शहर का पहला गाइड मैप जिसमें बाजार, माॅल, सिनेमा और प्रसिद्ध धर्मस्थलों का ब्योरा, विमान से 10 हजार फोटो लेकर छानी हर गली , December 21, 2020 at 05:21AM

छत्तीसगढ़ राज्य बनने के 20 साल बाद सर्वे ऑफ इंडिया ने हाल में राजधानी का पहला गाइड मैप तैयार किया है। लेकिन इस मैप के लिए काफी मशक्कत भी की गई है। डिजिटल तकनीक से नक्शा बनाने के लिए शहर के ऊपर सेना के विशेष विमान को कई बार उड़ाया गया और 10 हजार तस्वीरें ली गईं। उसके बाद 3 बाई 2.5 फीट के नक्शे में सेरीखेड़ी से टाटीबंध और कमल विहार के अंतिम छोर से रावांभाठा तक 259 स्क्वेयर किलोमीटर के दायरे में आने वाली एक-एक इंच जमीन नामी गई। इसे नक्शे पर लेकर हर चौक-चौराहे, गली, मोड़, मॉल, बाजार सड़क गली के साथ शहर के प्रमुख प्रतीक चिन्हों को नक्शे उतारा गया है। नक्शे में ये तक उतार दिया गया है कि जयस्तंभ चौक से शहर की कौन सी कालोनी कौन सा मोहल्ला यहां तक कि कौन सी बिल्डिंग और कौन सा धार्मिक स्थल कितनी दूरी पर है।

प्रसिद्ध और बड़े धार्मिंक स्थल के साथ-साथ शहर के एक-एक तालाब की भी दूरी मापी गई। चौक से वहां पहुंचने के लिए कितने मोड़ पार कितनी गलियां और कितनी सड़कें पार करनी होगी, इसे तक नक्शे में उतार दिया गया है। यह इतना स्पष्ट है कि नक्शा हाथ में लेकर कोई भी शहर के किसी भी हिस्से से कहीं भी पहुंच सकता है। सर्वे ऑफ इंडिया के डायरेक्टर जॉय कोंगारी और सर्वेक्षक अधिकारी निम्रोद तिग्गा के अनुसार देश के प्रमुख टूरिस्ट स्थलों के अलावा इस बार राजधानी का गाइड नक्शा बनाया है। इसमें डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल भी पहली बार किया गया। इस तकनीक के कारण ही शहर की एक-एक सड़क व गली इसमें शामिल की गईं। पूरा मैप बनाने में एक साल लग गया।

विमान की स्पीड के हिसाब से फिक्स किए कैमरे के क्लिक
सर्वे ऑफ इंडिया ने बेहद गोपनीय तरीके से नक्शे की प्रक्रिया शुरू की। सबसे पहले ऊंचाई से शहर की फोटो खींचने का प्लान बनाया गया ताकि फोटो के अनुसार पर शहर के हर हिस्से की जमीन को एक-एक इंच मापा जा सके। ऊंचाई से फोटो खींचने के लिए सेना के विमान की मदद ली गई। विमान में हाई रेजोलेशन का कैमरा लगाया गया। उसकी क्लिक को विमान की स्पीड से फिक्स की गई, ताकि सेकेंड में कई क्लिक किए जा सकें। विमान की दिशा और उसकी दूरी तय करने के बाद उड़ान भरी गई।

कोई कोना छूटे न, इसलिए लेनी पड़ी हजारों तस्वीरें
शहर का एक भी कोना फोटो खींचते समय कैमरे के दायरे में आने से छूट न जाए, इसका पूरा ध्यान रखा गया। इसलिए स्पेशलिस्ट तकनीशियनों की मदद ली गई। उसके बाद विमान में हाई रेजोलेशन का कैमरा लगाया गया। शहर के ऊपर चारों दिशाओं में उड़ान भरते समय एक क्लिक के बाद दूसरी फोटो इस तरह खींची गई कि दूसरी फोटो में पहली फोटो का 60% हिस्सा फिर से कवर हो। यानी दूसरी फोटो में पहली फोटो का 60 फीसदी हिस्सा दोबारा शामिल किया गया। ऐसा इसलिए ताकि फोटो जोड़ते समय किसी तरह की दिक्कत न आए। इसी वजह से 10 हजार से ज्यादा फोटो खींचने पड़े।

सेना के विमान के एक-एक तस्वीर लेकर जोड़ा गया फिर भेजी गई सर्वेयर
सेना के विमान से शहर के ऊपर से ली गई एक-एक तस्वीर को जोड़ा गया। तस्वीरों को जोड़ने के बाद उसके अलग-अलग हिस्से निकाले गए। उसके बाद चार सर्वेयर की टीम फील्ड में उतारी गई। फोटो के छोटे-छोटे हिस्से को लेकर फील्ड में पहुंची टीम वहीं पहुंची जहां की तस्वीरें उनके पास थीं। उसके बाद उन्होंने शहर के प्रमुख प्रतीक चिन्हों व चौराहों से हर जगह की दूरी नापी। पूरे एक साल तक सर्वे ऑफ इंडिया की टीम ने फोटो के छोटे छोटे हिस्से के अनुसार शहर की जमीन मापी। उसके बाद इंच सेंटीमीटर में उसे नक्शे पर उतारा। नक्शे में पांच सेंटीमीटर को एक किलोमीटर मानक तय किया गया। इसी हिसाब से नक्शे को देखकर अगर कोई इंच सेंटीमीटर से स्पष्ट हो जाएगा कि शहर की कौन सी जगह जय स्तंभ चौक या प्रमुख प्रतीक चिन्ह से कितनी दूरी पर है।



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सर्वे ऑफ इंडिया की टीम ने एक साल तक फोटो के छोटे-छोटे हिस्सों के अनुसार जमीन मापी। उसके बाद इंच-सेमी में उसे नक्शे पर उतारा।


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