केंद्र से नहीं मिला राज्य का हिस्सा, हर दिन 100 करोड़ का खर्च, फिर लेंगे 1000 करोड़ रु. कर्ज , December 08, 2020 at 05:32AM

केंद्र सरकार से राज्य के हिस्से की राशि नहीं मिलने के कारण एक बार फिर एक हजार करोड़ कर्ज लेने की तैयारी है। इसके लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया मंगलवार को फिक्स डिपॉजिट की नीलामी करेगा। तीसरे महीने में यह पांचवीं बार है, जब सरकार कर्ज ले रही है।
पिछले छह महीने से केंद्र ने जीएसटी के चार हजार करोड़ रुपए नहीं दिए हैं। इस वजह से अब राज्य को हर दिन के खर्च में भी दिक्कत आने लगी है। वेतन, पेंशन-ग्रेच्युटी, कर्ज का ब्याज व अन्य भुगतान मिलाकर राज्य को हर दिन 70 से 100 करोड़ रुपए लगते हैं। वित्त विभाग के अफसरों के मुताबिक केंद्र से राशि नहीं मिलने के कारण बार-बार कर्ज लेने की जरूरत पड़ रही है। बता दें कि अक्टूबर और नवंबर में राज्य सरकार ने कर्ज लिए हैं। दिसंबर महीने में यह पहला कर्ज है। इस बात की भी चर्चा है कि राज्य सरकार आरबीआई ने जो क्रेडिट लिमिट तय की है, उस सीमा में मार्च से पहले तक कर्ज लेगी। इसके बाद केंद्र पर दबाव बनाया जाएगा कि उन्हें राज्य के हिस्से की राशि नहीं मिलेगी तो कामकाज में दिक्कत आएगी। विकास के काम ठप हो जाएंगे। केंद्र व राज्य की साझेदारी से जो प्रोजेक्ट संचालित होते हैं, उसमें राज्य का हिस्सा देने में भी दिक्कत आएगी।

जमीनों की खरीदी-बिक्री बढ़ी, पिछले साल के मुकाबले 30 फीसदी ज्यादा हुई रजिस्ट्री
कोरोना संकट के बावजूद राज्य में जमीनों की खरीदी बिक्री बढ़ी है। पिछले साल के नवंबर के मुकाबले इस साल 30 फीसदी से ज्यादा रजिस्ट्री हुई है जबकि राजस्व में 26 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले साल नवंबर में 14 हजार 510 रजिस्ट्री हुई थी जबकि इस साल नवंबर में 18 हजार 926 प्रॉपर्टी का रजिस्ट्रेशन हुआ है, जो पिछले साल के मुकाबले 30 फीसदी ज्यादा है। इसी तरह नवंबर-19 में प्रॉपर्टी के रजिस्ट्रेशन से 93 करोड़ 42 लाख रुपए का राजस्व मिला था, जबकि बीते नवंबर में 117 करोड़ 99 लाख रुपए का राजस्व मिला है। यह पिछले साल के मुकाबले 23 फीसदी अधिक है। इसी तरह अक्टूबर-19 के मुकाबले इस साल में 13.63 प्रतिशत अधिक रजिस्ट्री हुई और राजस्व भी 8.71 प्रतिशत ज्यादा मिला।
क्यों बढ़ गए रजिस्ट्रेशन व रेवेन्यू : राज्य सरकार ने 5 डिसमिल से छोटे भू-खंडों की खरीदी-बिक्री में लगी रोक को हटा दिया है। संपत्ति की शासकीय गाइड लाइन दरों में 30 प्रतिशत की कमी गई। भूमि नामांतरण और डाइवर्सन की प्रक्रिया सरल की गई। रजिस्ट्री शुल्क 4 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत किया गया। रजिस्ट्री के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया, जिससे सभी प्रकार की अनुमति और अनापत्ति प्रमाण पत्र देने की प्रक्रिया आसान हुई। इससे प्रदेश के मध्यम वर्ग के लोगों को काफी राहत मिला है। भूपेश सरकार के इन निर्णयों से रियल सेक्टर को बढ़ावा मिला है।



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