राइस मिलर से 1.61 करोड़ का बकाया नहीं दिला पा रही छत्तीसगढ़ सरकार, अब थाना घेरेंगे किसान , December 24, 2020 at 04:49PM

कृषि उपज मंडियों से जुड़े नये और पुराने कानूनों पर छिड़ी बहस के बीच छत्तीसगढ़ से एक चिंताजनक तस्वीर आई है। यहां अन्नदाता सरकारी मंडियों में ही लुट गया है। सरकार एक राइस मिलर से तीन साल पुराना भुगतान नहीं करा पा रही है।

अब किसान राइस मिलर की गिरफ्तारी और बकाया भुगतान की मांग को लेकर थाने का घेराव करने की तैयारी में हैं। किसानों ने स्थानीय प्रशासन को 26 दिसम्बर को थाने का घेराव करने की सूचना दी है।

महासमुंद के किसान जागेश्वर चंद्राकर ने बताया, उनके सहित 56 किसानों ने सराडीह के महामाया एग्रोटेक को सौदा पत्रक पर 2017 में धान बेचा था।

यह धान 1250 रुपए से लेकर 1675 रुपए प्रति क्विंटल की दर से 2 करोड़ 21 लाख 12 हजार 839 रुपए का था। उसमें से किसानों को कुछ ही हिस्से का भुगतान हुआ। मिलर के पास अभी भी 1 कराेड़ 61 लाख 75 हजार रुपए का बकाया है।

पिछले साल महामाया एग्रोटेक ने साराडीह में अपने दोनों राइस मिल बंद कर उसका सामान निकाल लिया। उसके बाद उसने भुगतान बंद कर दिया। परेशान किसानों ने मंडी और जिला प्रशासन से गुहार लगाई।

मंडी में पंचायत बैठी। मिलर ने पहले तो पूरा भुगतान कर देने का दावा किया, लेकिन बाद में आंशिक भुगतान पर माना। मंडी ने उसे पूरा भुगतान देने का आदेश दिया। नहीं किया तो राइस मिलर की 7 एकड़ जमीन की कुर्की का आदेश जारी कर दिया। लेकिन मामला कानूनी दांवपेच में चला गया।

किसानों ने दिसम्बर में महामाया एग्रोटेक के संचालक तेजप्रकाश चंद्राकर के खिलाफ एफआईआर भी कराई, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।

किसानों का कहना है कि राइस मिलर की गिरफ्तारी हो जाती तो शायद भुगतान का दबाव बनता। अभी वह किसानों को ही फंसाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में वे 26 दिसम्बर को महासमुंद थाने का घेराव कर कार्रवाई की मांग करेंगे।

किसानों के इस घेराव पर प्रशासन क्या रुख अपनाता है यह अगले दो दिन में पता चल जाएगा। फिलहाल किसान अपनी ही फसल का दाम पाने के लिए सड़क पर संघर्ष करने को मजबूर है।

उच्च न्यायालय से स्टे ले आया व्यापारी

अधिकारियों ने बताया, पिछले वर्ष अक्टूबर में महासमुंद तहसीलदार के यहां कुर्की की कार्यवाही शुरु हुई। व्यापारी तेजप्रकाश चंद्राकर ने उच्च न्यायालय में कहा, मंडी बोर्ड ने उसे सुनवाई का अवसर नहीं दिया। इसके बाद उच्च न्यायालय ने कुर्की पर स्टे कर दिया।

मंडी बोर्ड को सुनवाई का अवसर देने का आदेश हुआ। व्यापारी को सुनने के बाद मंडी बोर्ड ने फिर से कुर्की का आदेश जारी किया है। यह प्रक्रिया अभी लंबित है। इस बीच व्यापारी ने मंडी बोर्ड में कुर्की रोकने का आवेदन दिया है।

किसान ही देर से आए, व्यापारी ने गुमराह किया

छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी बोर्ड के अतिरिक्त प्रबंध संचालक महेंद्र सिंह सवन्नी कहते हैं, मंडी से मिले सौदा पत्रक पर स्पष्ट तौर पर लिखा होता है, पांच दिन में भुगतान न मिले तो किसान मंडी को इसकी सूचना दें।

किसानों की ओर से भुगतान बकाए की कोई शिकायत नहीं मिली। उधर राइस मिलर ने भुगतान पत्रक जमा कर दिया। मंडी को लगा कि भुगतान हो गया। किसानों ने दो साल बाद शिकायत की।

मामला किसानों के हित से जुड़ा था। मंडी ने जांच की पता चला कि व्यापारी ने जो भुगतान पत्रक जमा कराए थे, उसपर किसानों के हस्ताक्षर फर्जी थे। दोनों पक्षों को सुनने के बाद राइस मिलर को किसानों का भुगतान करने का आदेश हुआ। उसने ऐसा नहीं किया तो कुर्की के लिए कलेक्टर को लिखा गया।



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मामले की सुनवाई के दौरान किसानों ने मंडी अधिकारियों के सामने सभी दस्तावेज और तथ्य पेश किए थे।


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