कोरोना काल में आरटीई ने दी स्कूलों को राहत, फीस के रूप में मिलेंगे 192 करोड़ , December 02, 2020 at 06:37AM

निजी स्कूल भले ही शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत गरीब बच्चों को एडमिशन देने से आनाकानी करते हों। लेकिन कोरोना काल में उसी आरटीई ने स्कूलों को बड़ी राहत दी है। बगैर क्लास इन निजी स्कूलों के बीच आरटीई मद से प्रतिमाह करीब 32 करोड़ रुपए बंटेंगे। यह राशि जून से ही दी जाएगी। दिसंबर तक कक्षाएं नहीं लगेंगी। इस तरह से जून से दिसंबर तक के लिए करीब 192 करोड़ रुपए बांटे जाएंगे।
शिक्षाविदों ने बताया कि आरटीई के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश पाने वाले छात्रों की फीस शासन से दी जाती है। प्राइमरी के लिए न्यूनतम 7 हजार और मिडिल के लिए करीब 11 हजार रुपए है। इस सत्र में 46 हजार छात्रों ने प्रवेश लिया है। प्राइमरी के अनुसार भी प्रतिमाह फीस को जोड़ा जाए तो यह राशि करीब 32 करोड़ रुपए होती है। कोरोना की वजह से इस बार मार्च से स्कूल बंद हैं। इस साल स्कूल खुलने की संभावना भी नहीं है। ऐसे में आरटीई से जिन छात्रों का प्रवेश हुआ है उनकी फीस स्कूलों को बगैर क्लासेस ही मिल जाएगी। हालांकि, कुछ स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाएं पिछले कुछ महीनों से चल रही है। लेकिन आरटीई के तहत प्रवेश सितंबर-अक्टूबर तक हुए हैं। अभी प्रवेश का दूसरा चरण बचा है। इसके तहत एडमिशन इस महीने होंगे। लेकिन इनकी भी फीस जून से ही जोड़ी जाएगी। इस तरह से स्कूलों के बीच बड़ी राशि बांटी जाएगी।

80 हजार आवेदन लेकिन 46 हजार ने लिया प्रवेश
राज्य के करीब साढ़े छह हजार निजी स्कूलों में आरटीई की 81 हजार सीटें हैं। इन सीटों में प्रवेश के लिए पहले चरण में करीब 80 हजार आवेदन आए। कई सीटों का आबंटन लॉटरी के माध्यम हुआ। जबकि कई ऐसे स्कूल थे जहां सीटों की तुलना में आवेदन कम मिले। इसलिए वहां आवेदन के आधार पर सीटें आवंटित की गई। इस तरह से पहले चरण में करीब 80 हजार सीटें बंटी। लेकिन इसमें से 46 हजार छात्रों ने प्रवेश लिया है। आरटीई से एडमिशन का दूसरा चरण जल्द शुरू होगा। शिक्षा विभाग से इसकी तैयारी की जा रही है।

जो सीटें आरक्षित उसमें ही प्रवेश, बाकी खाली
आरटीई के दायरे में आने वाले निजी स्कूलों की 25 फीसदी सीटें गरीब बच्चों के लिए आरक्षित है। जबकि 75 प्रतिशत सीटों में प्रवेश स्कूल अपनी सुविधा के अनुसार देते हैं। इस साल फरवरी में निजी स्कूलों ने आरटीई पोर्टल में सीट की जानकारी दी। मार्च-अप्रैल में आरटीई से प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके अनुसार पहले चरण में सीटें आवंटित की गई। आरटीई की सीटों के लिए छात्र तो मिल गए। लेकिन कई ऐसे स्कूल हैं जहां सामान्य सीटों पर प्रवेश ही नहीं हुए।

रायपुर के निजी स्कूलों में साढ़े छह हजार सीटें, चार हजार भरीं
शिक्षा के अधिकार के दायरे में रायपुर में करीब आठ सौ निजी स्कूल हैं। इन स्कूलों में गरीब बच्चों के लिए साढ़े छह हजार सीटें आरक्षित हैं। पहले चरण में करीब 6200 सीटें आबंटित की गई थीं। लेकिन इनमें से करीब 4 हजार सीटों पर ही प्रवेश हुआ है। दूसरे चरण में बचे हुए सीटों का आबंटन होगा। अफसरों का कहना है कि इसके लिए आवेदन मंगाए गए थे। जिन स्कूलों में सीटों की तुलना में आवेदन ज्यादा आए होंगे वहां लॉटरी के माध्यम सीटें बांटी जाएगी। जबकि जिन स्कूलों में सीटों की तुलना में आवेदन कम मिले होंगे वहां आवेदन के आधार पर ही सीटें आबंटित की जाएंगी। शिक्षाविदों का कहना है कि रायपुर में हिंदी मीडियम के अलावा इंग्लिश मीडियम स्कूलों की सीटें भी खाली हैं। हालांकि, इनमें से अधिकांश छोटे इंग्लिश मीडियम वाले स्कूल हैं।



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फाइल फोटो।


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