जमीन मालिकों ने 20 साल से नहीं दिया जरूरी डायवर्सन शुल्क, रोजाना सौ नोटिस , December 08, 2020 at 05:31AM

जमीन का उपयोग बदलवाने के बाद 20-20 साल से डायवर्सन शुल्क अदा नहीं करने वालों पर सख्ती शुरू कर दी गई है। राेज 100 से ज्यादा लोगों को डायवर्सन शुल्क अदा करने के लिए नोटिस भेजी जा रही है। अफसर लगातार नोटिस तामिली की मॉनीटरिंग कर रहे हैं। मार्च के पहले तक बकाया शुल्क शून्य करने का लक्ष्य दिया गया है। रायपुर जिले में ही 15 करोड़ डायवर्सन शुल्क अटका है।
कोरोना संक्रमण से भी डायवर्सन शुल्क की वसूली में असर पड़ा है। इस साल शुरुआत में जनवरी-फरवरी तक वसूली के प्रयास किए गए। मार्च से मई तक वसूली का काम पूरी तरह से बंद था। जून से फिर से वसूली शुरू की गई है। नई वसूली की फाइलें खंगालने के बाद ही पता चला कि कई लोगों ने बीस-बीस साल से शुल्क अदा नहीं किया है। पिछले साल 2019 में करीब 2 करोड़ रुपए ही वसूल किए गए थे। हालांकि इस साल अब तक 5 करोड़ वसूले जा चुके हैं। पुराने प्रकरणों में अफसरों की ओर से रुचि नहीं ली जाती। इस वजह से लोग भी शुल्क की अदायगी नहीं करते है। इससे रकम बढ़कर 15 करोड़ से भी ज्यादा की हो गई। कलेक्टर डॉ. एस भारतीदासन ने समय सीमा की बैठक में राजस्व अफसरों से कहा है कि शुल्क वसूलने के लिए लापरवाही बरती जा रही है। इससे अटका हुआ शुल्क हर साल कम होने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है। उन्होंने इस वित्तीय साल के खत्म होने तक पुराना बकाया शून्य करने का टास्क दिया है। इधर दूसरी ओर राजस्व निरीक्षकों और पटवारियों का कहना है कि जमीन के सभी रिकार्ड ऑनलाइन नहीं होने की वजह से इस बात की जानकारी ही नहीं मिलती है कि किस क्षेत्र में कितने लोगों का डायवर्सन शुल्क बकाया है। इस वजह से भी रकम घटने के बजाय हर साल बढ़ रही है। जैसे-जैसे पटवारियों का तबादला होता है फाइलें भी पुरानी होती जाती है और उन पर किसी का ध्यान नहीं जाता है।

जमीन की खरीदी-बिक्री कर ली कई बार, लेकिन शुल्क अदा नहीं किया
तहसील में जिन लोगों का डायवर्सन शुल्क बकाया है उनमें से अधिकतर ऐसे भी हैं जिन्होंने अपनी जमीन डायवर्सन कराने के बाद बेच दी है। बिना शुल्क जमा कराए ऐसे लोगों की रजिस्ट्री भी हो गई, क्योंकि डायवर्सन शुल्क जमा हुआ है या नहीं इसकी जांच करने का कोई सिस्टम ही नहीं है। ऐसे में कई नोटिसों की तामील भी नहीं हो पा रही हैं क्योंकि पुराने जमीन मालिक ऐसी नोटिस लेने से इंकार कर देते हैं। वे कहते हैं अब वे जमीन के मालिक नहीं है इसलिए शुल्क भी नहीं देंगे। इस वजह से कई लोगों का शुल्क विवादों में भी फंस गया है। अब इस पूरे मामले में रायपुर एसडीएम प्रणव सिंह और तहसीलदार अमित बैक ने विशेष अभियान चलाने की योजना बनाई है। उनका कहना है कि नोटिसों के आधार पर शुल्क की वापसी हो रही है। लेकिन पूरा शुल्क जमा नहीं हुआ तो ऐसे प्रकरणों पर आगे की कार्रवाई रोकने की नोटिस जारी की जाएगी।

जरूरत पर ही पेमेंट, बाकी बेखौफ
कृषि जमीन का आवासीय या कमर्शियल उपयोग करने या फिर आवासीय जमीनों का कमर्शियल उपयोग करने के लिए ही आवेदकों को डायवर्सन शुल्क देना होता है। बड़े कारोबारियों को जब इसकी जरूरत होती है तो वे एक बार में डायवर्सन शुल्क की अदायगी कर देते हैं, लेकिन जो छोटे-छोटे प्लॉट का डायवर्सन होता है उसका शुल्क अदा नहीं किया जा रहा है। लोग बेखौफ होकर सालों भुगतान नहीं कर रहे है। इस बार ऐसे ही लोगों को सबसे ज्यादा नोटिस दी जा रही है। अफसरों का कहना है कि जिन्हें नोटिस मिल रही है वे लोग दफ्तर आकर इस शुल्क का भुगतान कर रहे हैं।



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