2018 के सत्ता परिवर्तन अभियान में कांग्रेस की साझीदार रही “एकता परिषद” सरकार से पूरी संतुष्ट नहीं, मार्च 2021 न्याय और शांति यात्रा की तैयारी , December 14, 2020 at 03:23PM

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की मौजूदा सरकार 17 दिसम्बर को सत्ता में दो साल का कार्यकाल पूरा कर लेगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का दावा है, इन दो वर्षों में उनकी सरकार ने अधिकतम वादे पूरे कर दिए हैं। वहीं उनकी नीतियों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ऐसी मजबूती मिली है, जिससे प्रदेश का बाजार मंदी से अछूता है।

इस बीच 2018 के सत्ता परिवर्तन अभियान में कांग्रेस के नजदीकी जनसंगठनों की नाराजगी भी सामने आ रही है। भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए कांग्रेस के अभियान की नजदीकी सहयोगी रही एकता परिषद भी सरकार के कामकाज से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है।

एकता परिषद के संस्थापक राजगोपाल पीवी ने “दैनिक भास्कर” से विशेष बातचीत में कहा, कांग्रेस ने प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी का वादा किया था। इस वादे से महिलाओं को बड़ी अभिलाषा थी। वह लागू नहीं हुआ।

वन अधिकार कानून को लेकर भी सरकार का एप्रोच नहीं बदला है। बिरहोर जैसी आदिम जनजाति के लोगों को भी जंगल में अपना निवास साबित करने के लिए वन अधिकारियों को कागज दिखाना पड़े तो यह हास्यास्पद स्थिति है।

राजगोपाल पीवी कहते हैं, यह तब है जब छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की पहली सरकार के दौरान मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने आदिम जनजातियों से ऐसे दस्तावेज नहीं मांगने का समझौता किया था।

तिल्दा स्थित प्रयोग आश्रम में पिछले एक सप्ताह से चल रही परिषद के जमीनी कार्यकर्ताओं की बैठक में तय हुआ, अपनी मांगों के लिए 2021 में न्याय और शांति यात्रा की जाएगी।

यह यात्रा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च से ओडिशा-छत्तीसगढ़ की सीमा पर बसे गरियाबंद जिले के कुल्हाड़ीघाट गांव से शुरू होगी। पदयात्रा करते हुए कार्यकर्ता रायपुर पहुंचेंगे।

राजगाेपाल पीवी ने कहा, यह न्याय यात्रा सरकार को चुनौती देने के लिए नहीं है। छत्तीसगढ़ में विकास का नया मॉडल बनने की पूरी संभावना है। ऐसे में हम इस यात्रा के जरिए न्याय और शांति के अनुकूल माहौल बनाने की बात करेंगे।

सत्ता परिवर्तन के अभियान में महत्वपूर्ण सहयोगी रहे जनसंगठन के इस रुख से कांग्रेस असहज दिख रही है। राजगोपाल पीवी के तिल्दा-रायपुर प्रवास के दौरान कई वरिष्ठ मंत्रियों और कांग्रेस नेताओं ने उनसे मुलाकात की है। उनकाे सरकार की उपलब्धियां बताने और उनकी चिंताओं के समाधान की भी कोशिश की गई है।

तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और कांग्रेस की वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी 1985 में कुल्हाड़ीघाट आए थे। फाइल फोटो।

कुल्हाड़ीघाट से यात्रा का प्रतीकात्मक महत्व

कांग्रेस की सरकारों के लिए गरियाबंद के कुल्हाड़ीघाट गांव का प्रतीकात्मक महत्व है। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी करीब 35 साल पहले 14 जुलाई 1985 को सोनिया गांधी के साथ कुल्हाड़ीघाट आए थे।

आदिम जनजाति “कमार” बहुल इस गांव में राजीव और सोनिया एक रात रुककर ग्रामीणों से बातचीत करते रहे थे। इस दौरान उन्होंने इस गांव की तस्वीर को बदल देने का वादा किया था। लेकिन ऐसा हो नहीं पाया।

मुख्यमंत्री से से मिलकर शांति मंत्रालय की मांग

एकता परिषद के राजगोपाल पीवी ने पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात कर प्रदेश में शांति और न्याय की स्थापना में सहयोग का प्रस्ताव दिया था। राजगोपाल पीवी ने बताया, मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री से विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने उन लोगों को बताने की कोशिश की, सरकार की पहल से प्रदेश में कैसा परिवर्तन हो रहा है। अर्थव्यवस्था की बात हुई। उन्होंने चुनावी वादों में से अधिकतर के पूरा होने का दावा किया।

एकता परिषद ने मुख्यमंत्री को प्रदेश में शांति मंत्रालय की स्थापना का सुझाव दिया है। उन्होंने बताया, उनके सुझाव पर फिलहाल राजस्थान की सरकार में शांति विभाग ने काम करना शुरू किया है।

एकता परिषद के राजगोपाल पीवी ने पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से भी मुलाकात कर विकास, शांति और सद्भावना पर विस्तृत चर्चा की।

शांति-सद्भावना को पाठ्यक्रम में जगह मांगी

मुख्यमंत्री को एक पत्र सौंपकर एकता परिषद ने सुझाव दिया है कि छत्तीसगढ़ में सभी शैक्षणिक संस्थानों में “शांति और सद्भावना से संबंधित औपचारिक शिक्षा” सामाजिक न्याय के स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। जेलों में भी “शांति और सद्भावना” विषय पर कैदियों और सम्बन्धित कर्मचारियों के साथ संवाद पर जोर दिया गया।

गांधी भवन की जरूरत भी बताई

एकता परिषद ने छत्तीसगढ़ में महात्मा गांधी के मूल्यों के प्रचार-प्रसार के लिए एक "गांधी भवन" की स्थापना का सुझाव भी दिया है। जिसके लिए विस्तृत योजना परिषद द्वारा प्रस्तुत की जाएगी।



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17 मई 2018 को पेण्ड्रा तहसील के कोटमी में कांग्रेस ने जंगल सत्याग्रह का आयोजन किया था। इसमें एकता परिषद के राजगोपाल पीवी और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रमुख हीरासिंह मरकाम कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ एक मंच पर आए थे। आदिवासी क्षेत्रों में भाजपा सरकार के खिलाफ माहौल बनाने में इस गठबंधन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। फाइल फोटो।


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