शहर में 3 साल पहले नियमितीकरण से 20 हजार निर्माण वैध हुए, यही कानून फिर लाने की तैयारी , December 11, 2020 at 05:20AM

राजधानी में पिछले तीन साल में हुए अवैध या छोटी-मोटी खामी वाले निर्माण (घर, दुकानें, कांप्लेक्स या अन्य) को रेगुलर करने के लिए राजधानी में जल्दी ही उसी तरह का नियमितिकरण कानून लागू किया जा सकता है, जैसा 2016 में भाजपा सरकार के कार्यकाल में था। नगरीय निकाय विभाग में खामोशी से इस प्रस्ताव पर विचार चल रहा है और राजधानी के नगर निगम प्रशासन के पास ऐसे संकेत पहुंच गए हैं कि नियमितिकरण की प्रक्रिया जल्दी शुरू होने वाली है। इस संकेत के आधार पर यहां भीतर ही भीतर तैयारी भी शुरू हो गई, हालांकि उच्च अफसर और जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर चुप हैं। सूत्रों का कहना है कि पिछले तीन साल में राजधानी में मकान, कांप्लेक्स तथा अन्य को मिलाकर लगभग 10 हजार निर्माण हुए हैं। इनमें से अधिकांश में कोई न कोई खामी है। अगर इन्हें नियमित किया जाता है तो इससे लोगों को तो फायदा होगा ही, निगम-शासन को भी काफी आमदनी मिल सकती है।
राज्य सरकार ने 2016 में अवैध निर्माणों के नियमितीकरण को लेकर एक कानून बनाया था। इससे राजधानी में ही करीब 20 हजार मकान, कांप्लेक्स और भवन वैध हुए। इसी कानून में थोड़े संशोधन की प्रक्रिया चल रही है। उसके बाद यह लागू किया जाएगा। दरअसल 2016 से पहले हुए अवैध निर्माणों को नियमित करने के लिए ही अनाधिकृत विकास का नियमितीकरण संशोधन कानून 2016 लाया गया था। इसमें 1 नवंबर 1984 से 1 अगस्त 2016 के हुए अवैध निर्माणों को नियमित करने का मौका दिया गया था। इस छूट का रायपुर के लोगों ने बड़ी संख्या में लाभ उठाया। लगभग 20 हजार लोगों ने आवेदन किए थे और कुछ को छोड़कर लगभग सभी का नियमितीकरण हुआ था। शहर में 1200 वर्गफीट या इससे नीचे के निर्माण के शतप्रतिशत मामलों में नियमितिकरण कर दिया गया था। नियम व शर्तों का पालन नहीं करने वाले व्यावसायिक निर्माण और कांप्लेक्स को भी आवश्यक संशोधन कर राहत दी गई। इससे राज्य शासन और निगम को भी जुर्माने के रूप में काफी लाभ हुआ था। दूसरा बड़ा लाभ यह हुआ कि नियमितीकरण से राजस्व और निगम के रिकार्ड अपडेट हो गए थे। सूत्रों के अनुसार मामला अब केवल शासन के समक्ष विचाराधीन है। वहां से मंजूरी मिलते ही राजधानी में यह प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

दोबारा इसलिए

  • शहर में 3 साल में 10 हजार से ज्यादा घर-कांप्लेक्स बने
  • अधिकांश मकान 12सौ वर्गफीट से नीचे, इन्हें होगा लाभ
  • आउटर में हुए ज्यादातर निर्माण का नियमितिकरण जरूरी
  • पिछले नियमितिकरण कानून से शासन को भी हुआ लाभ

प्रदेशभर में लागू था कानून
नियमितिकरण में लगने वाले शुल्क में छूट और सरलीकरण के लिए छत्तीसगढ़ अनधिकृत विकास का नियमितीकरण संशोधन 2016 लागू किया गया था। यह अधिनियम 1 अगस्त लागू हुआ, जिसके अंतर्गत 1 नवंबर 1984 से 1 अगस्त 2016 के बीच निर्मित हुए आवासीय मकान व कमर्शियल कॉम्पलेक्स के अनधिकृत विकास के प्रकरणों का निराकरण किया गया। इसके पीछे राज्य शासन की कल्याणकारी योजनाओं से संबंधित योजनांतर्गत प्रदेशभर के नगरों, कस्बों व निवेश क्षेत्र में रहने वाले जनता को विशेष लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से अनधिकृत विकास का नियमितिकरण अधिनियम लागू किया गया है। इसके अंतर्गत निजी भूमि पर बिना अनुमति व अनुमति के विपरीत बनाए गए मकानों का नियमितिकरण आसानी से किया जा सकता है। इसके लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, नगर निगम, नगर पालिका व नगर पंचायत कार्यालय में जमा करा सकते हैं।

120 वर्गमीटर से अधिक पर जुर्माना
पूर्व में नियमितीकरण के लिए लोगों को भवन का नक्शा, निर्माण के चारों तरफ की फोटो के साथ आवेदन करना था। आवेदन के लिए किसी तरह का शुल्क नहीं लिया गया। आवासीय निर्माण के लिए नियमितीकरण शुल्क कम रखा गया था। 120 वर्ग मीटर तक के भूखंड पर निर्माण में किसी तरह का शुल्क नहीं लिया गया। 120 से 240 वर्गमीटर पर 125 रुपए प्रति वर्ग मीटर, 240 से 360 वर्ग मीटर तक दो सौ रुपए प्रति वर्गमीटर और 260 वर्गमीटर से अधिक पर तीन सौ रुपए प्रति वर्गमीटर की दर से नियमितीकरण शुल्क लिया गया।

लाभ ही होगा
"नियमितीकरण कानून से राजधानी के लोगों को लाभ हुआ था और निकाय-शासन को भी फंड मिला था। राजस्व और निगम के रिकार्ड दुरुस्त हुए थे, इसलिए दोबारा नियमितीकरण किया गया तो लाभ ही होगा।"
-एजाज ढेबर, महापौर रायपुर



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