छत्तीसगढ़ में 45 लाख मीट्रिक टन धान की सरकारी खरीदी, सरकार बोली- केंद्र नहीं उठा रहा है चावल, भाजपा कह रही यह सरकार का बहाना , December 30, 2020 at 11:25AM

छत्तीसगढ़ में धान की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। सरकार ने मंगलवार शाम तक 45 लाख 48 हजार मीट्रिक टन धान खरीद लिया है। इसमें से अधिकांश खरीदी और संग्रहण केंद्रों में पड़ा हुआ है। सरकार का कहना है कि केंद्र सरकार ने उनके धान से बना चावल अभी तक जमा करना शुरू नहीं किया है। इधर भाजपा इसे धान नहीं खरीदने का बहाना बताकर राज्य सरकार पर हमलावर है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है, सैद्धांतिक सहमति जताने के बावजूद केंद्र सरकार अभी तक 60 लाख मीट्रिक टन चावल केंद्रीय पूल में जमा करने का आदेश जारी नहीं कर पाई है। ऐसे में भारतीय खाद्य निगम यहां चावल नहीं ले रहा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पिछले दिनों इस संबंध में केंद्रीय खाद्य मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर चावल जमा करने का आदेश जारी करने की मांग की थी।

मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा था, छत्तीसगढ़ ने 26 लाख मीट्रिक टन उसना चावल और 14 लाख मीट्रिक टन अरवा चावल को एफसीआई में जमा करने की अनुमति का प्रस्ताव पहले ही केंद्र सरकार को भेज दिया है। इस विषय पर केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों के बीच बातचीत भी होती रही है। लेकिन अभी तक अनुमति नहीं मिली है।

इधर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने मुख्यमंत्री की मांग को धान खरीदी से बचने की नई पैंतरेबाजी बताया है। विष्णुदेव साय ने कहा, केंद्र सरकार पहले ही सेंट्रल पूल में पिछले वर्ष के मुक़ाबले ड्यौढ़ा अधिक चावल लेने का एलान कर चुकी है। इसके एवज में 9 हजार करोड़ रुपए की राशि भी प्रदेश सरकार को दी जा चुकी है। उन्होंने पूछा, यह पैंतरा आजमाकर मुख्यमंत्री किसानों के साथ शर्मनाक खेल क्यों खेल रहे हैं?

प्रदेश में एक दिसम्बर से धान की सरकारी खरीदी शुरू हुई है। 31 जनवरी तक सरकार का लक्ष्य 90 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने की है। प्रति एकड़ 15 क्विंटल की खरीदी हो रही है। इसके लिए किसानों को 1868 रुपए प्रति क्विंटल की दर से अभी और 632 रुपए बाद में दिया जाना है। कांग्रेस सरकार ने किसानों को 2500 रुपया प्रति क्विंटल दाम देने का वादा किया था। इसके लिए राजीव गांधी किसान न्याय योजना शुरू हुई है।

बारदानों का भी संकट, गुस्से में किसान

छत्तीसगढ़ में इस बार धान खरीदी के लिए बारदानों की भी कमी है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कह रहे हैं, धान खरीदी के लिए 3 लाख 50 हजार गठान जूट के बारदानों की जरूरत होती है। इसकी मांग पर केंद्र सरकार ने केवल 1 लाख 45 हजार गठान बारदानों की सहमति दी। अभी तक 1 लाख 5 हजार गठानें ही मिल पाई हैं।

सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली में मौजूद खाली बारदानों, मिलरों के पास मौजूद बारदानों और किसानों के पास मौजूद बारदानों को फिर से इस्तेमाल को कहा है। वहीं प्लास्टिक के बारदाने भी खरीदे जा रहे हैं।

खरीदी पर दिखने लगा है असर

केंद्र और राज्य सरकार के बीच चल रही इस खींचतान का असर धान की खरीदी पर दिखने लगा है। सरकार ने जो 45 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा है, उसमें से महज 10 लाख 58 हजार मीट्रिक टन धान ही कस्टम मीलिंग के लिए गया है। शेष धान संग्रहण केंद्रों में खुले में पड़ा है।

चावल जमा नहीं होने से मिलर के पास भी जगह नहीं बची। ऐसे में वह नया उठान नहीं कर रहा है। चावल जमा नहीं होने से बारदाने भी खाली नहीं हो रहे हैं। ऐसे में सहकारी समितियां बेहद धीमी रफ्तार से खरीदी कर रही हैं। इससे किसानों को काफी इंतजार करना पड़ रहा है। कई जगह आंदोलन हो रहे हैं।



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अन्य प्रदेशों की तुलना में अधिक मूल्य होने की वजह से प्रदेश के अधिकांश किसान सरकारी खरीदी पर निर्भर हैं।


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