सहकारी बैंक की 8 ब्रांचों ने 20 करोड़ से ज्यादा के कर्ज की जानकारी छुपा ली, सभी को नोटिस, मोहलत खत्म फिर भी पोर्टल को अपडेट नहीं किया , December 25, 2020 at 05:18AM

सहकारी केंद्रीय बैंक के अधीन संचालित ब्रांचों में 20 करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज छुपाया जा रहा है। इसे धान खरीदी पोर्टल में अपडेट नहीं किया गया है। क्योंकि बैंक की शाखाओं को इस बात का डर है कि धान के प्रोत्साहन राशि के रूप में मिलने वाले पैसे बैंक प्रबंधन पुराने ऋण के तौर पर वापस नहीं ले ले। इसके चलते ही यह गड़बड़ी की गई है। दिखावे के लिए सहकारी बैंक के सीईओ अनूप अग्रवाल ने आठ ब्रांचों को नोटिस जरूर भेजा है, पर किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यही वजह है कि बैंक प्रबंधन के कामकाज पर सवाल उठने लगे हैं।
सहकारी केंद्रीय बैंकों के अधीन आने वाली समितियों पर लगभग सवा सौ करोड़ रुपए का कर्ज है। सरकार इसकी रिकवरी सोसायटियों को बंटने वाले धान के जीरो शॉर्टेज कमीशन के पैसों से कर रही है। दिखावे के तौर पर समितियों को रुपए बांटे जा रहे हैं। इसके तुरंत बाद इन पैसों को सहकारी बैंक अपने अकाउंट में ट्रांसफर करवाना शुरू देता है। इससे सोसायटी संचालन मुश्किल में पड़ रहा है। स्थिति यह बन गई है कि कई समितियां अपने कर्मचारियों को वेतन तक नहीं दे पा रही हैं। रानीगांव के बैंक में 24 महीने का वेतन नहीं बंट पाया है। कर्मचारियों के काम में मन नहीं लगने का यह भी बड़ा कारण है। दूसरी तरफ शाखाओं में इसी कर्ज को छुपाने का खेल जारी है। ब्रांच मैनेजर पुराने ऋण की प्रविष्टियां धान खरीदी पोर्टल में नहीं कर रहे। जिसके चलते यह सामने नहीं आ पा रहा है कि कौन सी समिति का कितना कर्ज बकाया है। बैंक के सीईओ ने इसी मामले को लेकर रतनपुर, मस्तूरी, मल्हार, करगीरोड, लोहर्सी ब्रांच को नोटिस भेजना शुरू किया है। उन्होंने सभी जगह के ब्रांच मैनेजर को निर्धारित दिनों में इस कर्ज को धान खरीदी पोर्टल में अपडेट करने की बात कही है। फिर भी अभी तक ब्रांच मैनेजरों ने यहां काम करना शुरू नहीं किया है।

कमीशन मिलते ही वसूली शुरू नहीं हो, इस बात का डर
बिलासपुर जिले की समितियों को तीन साल पहले करोड़ों रुपए का कमीशन बांटा गया था। तब दावे किए गए कि रुपयों से सोसायटी का विकास होगा। आर्थिक स्थिति सुधरेगी और किसानों को परेशानी नहीं होगी। इसके कुछ दिनों बाद ही इन पैसों की रिकवरी की योजना तैयार कर ली गई। जैसे ही कमीशन के पैसे बांटे गए। दूसरे या तीसरे दिन इसकी वापसी शुरू करा ली गई। इसके बाद विकास के सारे दावे फेल हो गए। समितियों को इसी बात का डर सता रहा है, जिसके चलते पुराने कर्ज की प्रवृष्टियां नहीं की गई है।



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