97 गांवों में राजस्व मामले के काम ठप जरूरतमंदों को आना पड़ रहा तहसील , December 25, 2020 at 05:20AM

पटवारियों की हड़ताल की वजह से बिलासपुर तहसील के 97 गांवों में राजस्व मामलों का काम रुक गया है। इन मामलों में रिकार्ड दुरुस्ती, सीमांकन, नामांतरण के अलावा वे छोटे माेटे काम हैं जिनका वास्ता पटवारियों से पड़ता है। इधर, राजस्व पटवारी हड़ताल पर हैं। ऐसे में लोगों काे अपने कामों को लेकर तहसील कार्यालय तक आना पड़ रहा है।
बैमा नगोई से आए प्रहलाद सूर्यवंशी व बलराम सूर्यवंशी ने बताया कि वे जाति प्रमाण पत्र के लिए पटवारी के कहने पर यहां तहसील आए हैं। यदि पटवारी उनके क्षेत्र में रहता तो उन्हें आने की जरूरत नहीं होती। इसी तरह रतनपुर से आए छात्र मयंक सिंदुरा ने बताया कि परीक्षा के लिए जरूरी अंकसूची अपलोड करनी थी जिसमें पटवारी के कहने पर वह तहसील आया है। अपलोड नहीं किया तो छात्रवृति नहीं मिलेगी। हड़ताल की वजह से ऐसे कई मामले लेकर जरूरतमंद लोग तहसील आ रहे हैं। बिलासपुर तहसील में वर्तमान में 49 हल्के हैं जिनमें 97 गांव आते हैं। पटवारियों की हड़ताल से अब इन गांवों की कमान सिर्फ सात राजस्व निरीक्षक संभाल रहे हैं। इस मामले में एसडीएम देवेंद्र पटेल का कहना है कि पटवारियों की हड़ताल की वजह से जरूरी काम राजस्व निरीक्षक निपटा रहे हैं लेकिन उनकी संख्या भी सीमित है।

रकबा सुधार के लिए आए किसान होते रहे परेशान
बिलासपुर तहसील के विभिन्न गांवों से किसान रकबा सुधार के लिए लोकसेवा केंद्र पहुंच रहे हैं। भदोरियाखार से आए किसान राजकुमार ने बताया कि उसकी 80 डिसमिल जमीन है लेकिन ऑनलाइन में उसकी जमीन ही नहीं है। ऑनलाइन डेटा सुधार करने के लिए बैठी महिला आपरेटर ने कहा कि अब आवेदन देने से भी कुछ नहीं होगा। सेमरताल से आए गुड्डा सूर्यवंशी ने बताया कि उनकी एक एकड़ जमीन रिकार्ड में नहीं है। आवेदन देने के बाद भी कुछ नहीं हो रहा है। किसान घनश्याम ने बताया कि वे सेमरताल के पास भदोरियाखार से आए हैं। ऑनलाइन में उनकी जमीन ही पता नहीं चल पा रहा है। जलसो से आए किसान जनकराम केंवट ने बताया कि पटवारी के कहने पर भी महिला आपरेटर उनका रिकार्ड सुधार नहीं कर रही है।

यह काम भी नहीं हो पा रहे हैं

  • {नर्वाचन पुनरीक्षण कार्य 15 दिसम्बर को समाप्त हो गया है लेकिन पटवारी को सुपरवाइजर बनाए जाने और उनके हड़ताल पर जाने से फॉर्म जमा नहीं हो पाया।
  • मतदाताओं के नाम जुड़ने, संशोधन व काटने काम शुरू नहीं हो सका है।
  • किसानों की लगान वसूली की सूची तैयार नहीं हुई है जिससे राजस्व बकाया की वसूली नहीं हो पाएगी।
  • डिजिटल साइन नहीं होने के कारण बी 1 खसरा का प्रिंट नहीं निकल पा रहा, किसान अपनी जमीन नहीं बेच पा रहे हैं।


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