CM बघेल ने कहा- आलाकमान कहे तो इस्तीफा दे दूंगा; जो नेतृत्व परिवर्तन की बातों को हवा दे रहे, उन्हें प्रदेश के विकास से दिक्कत , December 12, 2020 at 05:35AM

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि उन्हें पद का मोह नहीं है, आलाकमान जब उनसे कहेगा, वे राज्यपाल के पास पहुंचकर इस्तीफा दे देंगेे। दरअसल, चर्चा है कि कांग्रेस हाईकमान ने राज्य में मुख्यमंत्री पद के लिए ढाई-ढाई साल का कार्यकाल बांटा है। इसके मुताबिक, पहले ढाई साल भूपेश बघेल को मुख्यमंत्री रहना है और आखिरी ढाई साल टीएस सहदेव मुख्यमंत्री होंगे। बता दें कि 17 दिसंबर को भूपेश बघेल सरकार के दो साल पूरे हो रहे हैं।

उधर, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस तरह की चर्चा को मनगढ़ंत बताया और कहा कि जो भी इस तरह की बातों को हवा दे रहे हैं, उन्हें प्रदेश के विकास से से दिक्कत है। ऐसे लोगों को सचेत रहना चाहिए। शुक्रवार को सरगुजा दौरे पर रवाना होने से पहले शुक्रवार को भूपेश बघेल ने ये बातें कही।

सिंहदेव ने कहा था- मुख्यमंत्री का कार्यकाल आलाकमान की इच्छा पर निर्भर करता है

दरअसल, दो-तीन दिन पहले बिलासपुर में ढाई साल के कार्यकाल वाले चर्चा पर पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए स्वास्थ्य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा था कि मुख्यमंत्री का कार्यकाल आलाकमान की इच्छा पर निर्भर करता है। मुख्यमंत्री दो दिन के भी हुए हैं और 15 साल के भी। यह सब आलाकमान तय करता है।

फिलहाल, प्रदेश में इस तरह की चर्चाओं से भूपेश बघेल सरकार में गलतफहमियां बढ़ने का अंदेशा बढ़ता जा रहा है। मुख्यमंत्री सरगुजा दौरे पर हैं जबकि उसी इलाके के दिग्गज नेता टीएस सिंहदेव उनके साथ न होकर दिल्ली पहुंचे हुए हैं।

टीएस सिंहदेव नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं। कांग्रेस का घोषणापत्र बनाने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। फाइल फोटो।

मुख्यमंत्री पद के दावेदार रहे हैं टीएस सिंहदेव

दरअसल 2018 के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद मुख्यमंत्री पद के तीन दावेदार उभरे थे। कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल, चौथी विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता टीएस सिंहदेव और ओबीसी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ताम्रध्वज साहू इसमें शामिल थे।

ताम्रध्वज साहू के नाम पर भी बनी थी सहमति

हाईकमान ने इन तीनों के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. चरणदास महंत को भी महत्व दिया। चारो को दिल्ली बुलाया गया। सूत्रों का कहना है, पहले दौर की बातचीत में ही महंत विधानसभा अध्यक्ष बनने की बात पर मुख्यमंत्री का दावा छोड़ने को तैयार हो गए।

कई दौर की बातचीत के बाद हाईकमान ने ताम्रध्वज साहू को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला कर लिया। साहू ने इसकी सूचना अपने समर्थकों को दे दी। रायपुर और दुर्ग में जश्न शुरू हो गया।

बाद में भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव इस फैसले के खिलाफ एकजुट हो गए। दोनों ने संदेश भिजवाया कि अगर साहू को सीएम बनाया जाता है तो वे मंत्रिमंडल में शामिल नहीं हो रहे हैं।

आनन-फानन में फिर से बैठकें हुई। साहू को मनाया गया। इसकी सूचना पहुंची तो रायपुर में साहू समाज सड़कों पर उतरकर विरोध जताने लगा। इसमें भी काफी फजीहत हुई।

यहां से निकला था ढाई-ढाई साल का फार्मूला

वहीं भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव के बीच मुख्यमंत्री पद का फैसला करना था। बताया जाता है कि इसी बैठक में दोनों नेताओं के बीच ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री के फार्मूले की सहमति बनी थी।

सूत्रों ने बताया, हाईकमान के सामने हुए मौखिक समझौते में पहले ढाई साल भूपेश बघेल को मुख्यमंत्री रहना था और बाद के ढाई साल टीएस सिंहदेव को वह कुर्सी संभालनी थी।

भाजपा बोली, स्थिति स्पष्ट करे कांग्रेस हाईकमान

इन चर्चाओं को लेकर विपक्ष भी हमलावर है। पूछा जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान सत्ता विभाजन के इस फार्मूले को स्पष्ट करे। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल काैशिक ने कहा, अब वक्त आ गया है कि कांग्रेस का हाईकमान ये बताए कि क्या ढाई- ढाई साल का कोई फार्मूला है। कांग्रेस हाईकमान ये स्पष्ट करे कि प्रदेश का अगला मुख्यमंत्री कौन रहेगा।

जकांछ ने कहा, गुलाम मानसिकता का परिचायक

जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने कहा, सीएम के बयान से स्पष्ट लग रहा है कि ऐसा कोई फार्मूला है। उन्हें स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा, इस तरह का बयान गुलाम मानसिकता को दिखाता है, जिसमें सारे फैसले दिल्ली से होते हैं। यह कांग्रेस की कार्यसंस्कृति का हिस्सा है।



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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इन सवालों को लेकर पहली बार ऐसा बयान दिया है। -फाइल फोटो।


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