रायपुर में किराए की साइकिल लेकर घूमाते थे मोतीलाल वोरा, लाल डिब्बे वाले नेता के नाम से हुए थे मशहूर , December 22, 2020 at 06:25AM

80 के दशक का रायपुर शहर, गवाह रहा है युवा मोतीलाल वोरा के मेहनती अंदाज का। वो दुर्ग से रायपुर सरकारी बस से आते थे, फिर यहां जयस्तंभ चौक के पास पुराने बस अड्‌डे से किराए की साइकिल लेकर खबरों की खोज किया करते। शहर के पुराने अखबारों के दफ्तरों में भी उनका बतौर संवाददाता आना-जाना था। सोमवार को मोतीलाल वोरा के निधन की खबर आई। उन्हें याद करते हुए वरिष्ठ संपादक रमेश नैयर ने बताया कि सभी मोतीलाल के परिश्रमी व्यक्तित्व के कायल थे। पत्रकार रहने के अलावा मोतीलाल वोरा ने दुर्ग, राजनांदगांव में पेट्रोल डिस्ट्रीब्यूशन और ट्रांसपोर्ट कंपनियों में भी काम किया।


लाल डिब्बे वाले नेता जी
रमेश नैयर कहते हैं, कि उन दिनों मोती लाल वोरा और अर्जुन सिंह समाजवादी नेता हुआ करते थे। मोतीलाल वोरा पत्रकारिता के साथ आंदोलनों में भी सक्रिय थे। किसान,मजदूर और आदिवासियों के मुद्दों पर पूरी तरह से एक्टिव थे। जब कांग्रेस में अर्जुन सिंह ऊंचाई हासिल कर रहे थे, तो मोतीलाल वोरा भी उनके साथ आगे बढ़ने लगे। पूर्व में समाजवादी होने की वजह से वो लाल टोपी भी पहनते थे। उनके साथी मजाकिया अंदाज में पूछते थे कि नेता जी लाल टोपी कहां हैं, वो अक्सर इस बात को हंस कर टाल देते थे।


22 दिसंबर को होगा अंतिम संस्कार


रमेश नैयर ने बताया कि जन आंदोलनों में आगे रहने वाले मोतीलाल वोरा को पहली बार परिवहन निगम का पदाधिकारी बनाया गया। परिवहन निगम सरकारी बसों का संचालन करता था। वो बसें लाल हुआ करती थीं। हम सभी उन्हें लाल डिब्बा कहते थे। जब मोतीलाल इसके पदाधिकारी बने तो उन्हें लाल डिब्बे वाले नेता कहा जाने लगा। यह बिल्कुल शुरूआत की बात है। इसके बाद मोतीलाल सूरज की तरह राजनीति में चमकते गए।


एक दिन पहले ही मनाया गया जन्म दिन
20 दिसंबर को ही मोतीलाल वोरा का जन्म दिन था। सोशल मीडिया में उन्हें जन्म दिन की बधाई देते हुए पोस्ट दिख रहे थे। 21 दिसंबर को अब उनकी मौत की खबर के बाद रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव समेत देश के सियासी चेहरे उदास हैं। दुर्ग में रविवार को जन्म दिन का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया था। इस मौके पर उनके बेटे और दुर्ग से विधायक अरुण वोरा ने सोशल मीडिया पर लिखा - पिता जी आपका आर्शीवाद हम पर बना रहे


वो आखिरी पोस्ट
मोतीलाल वोरा के सोशल मीडिया पेज को देखें तो एक भावुक पोस्ट सबसे ऊपर दिखती है। मोतीलाल वोरा ने इस आखिरी पोस्ट को मार्च के महीने में लिखा था। उन्होंने लिखा - सदन के अंतिम दिन मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, व विशेष तौर पर दुर्ग की जनता को मैं प्रणाम करता हूँ। मेरे लिए यह गर्व की बात है, इंदिरा जी के साथ शुरुवात कर राहुल जी के साथ देने तक अपना सर्वस्व कांग्रेस को मजबूत करने में लगाया, पार्षद से लेकर मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री व राज्यपाल के रूप में मैंने सेवाएं दीं। आगे भी राहुल जी को विश्वास दिलाना चाहता हूं। यह कार्यकर्ता आपके लिए सदैव तत्पर है.. पक्ष एवं विपक्ष के सभी नेताओं का सहयोग के लिए आभार..
आपका
मोतीलाल वोरा।

प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, मोतीलाल वोरा को बाबू जी कहा करते थे, उन्होंने उनके निधन पर कहा, यह खालीपन कभी नहीं भरेगा।


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बेहद सामान्य से परिवार से आने वाले मोतीलाल को इंदिरा गांधी ने एमपी कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया। फिर वो दो बार सीएम भी रहे। मोतीलाल कांग्रेस के आधार स्तंभ माने जाते रहे हैं।


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