पोलियो टीकों के लिए नहीं जुटा पाए वैक्सीन की गाड़ियां, सामान्य वाहनों में भरकर ले गए , December 23, 2020 at 07:10AM

कोरोना की वैक्सीन से पहले आए पोलियो टीकों ने इन्हें सुरक्षित रखने से लेकर अलग-अलग जिलों में भेजे जाने के सिस्टम और कोल्ड चेन की बुरी स्थिति का खुलासा कर दिया है। वैक्सीन को अलग-अलग जगह पहुंचाने के लिए वैक्सीन गाड़ियां चाहिए, जो यहां नहीं के बराबर हैं। भास्कर टीम ने मंगलवार को पोलियो वैक्सीन के परिवहन को करीब 3 घंटे देखा। यह बात सामने आई कि ज्यादातर जिलों ने वैक्सीन गाड़ियों के बजाय टैक्सी वाली गाड़ियां भेजीं। यहां से उन्हीं गाड़ियों में पोलियो टीके भेज भी दिए। पता यह चला कि कई जिलों में वैक्सीन के वाहन खराब हो चुके हैं और कई जिलों में हादसे वगैरह के बाद अरसों से खड़े रहकर कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं।
भास्कर की पड़ताल के मुताबिक केंद्र सरकार ने सभी जिलों को 5 साल पहले वैक्सीन वाहन दिए थे। लेकिन कई वाहन अब भी ऐसे हैं कि पांच साल बीतने के बाद भी इनके आरटीओ से वैध कागजात नहीं बने हैं। इसीलिए कई जिलों से अफसरों ने पोलियो वैक्सीन ले जाने के लिए वहां उपलब्ध किराए की एसयूवी या कारें भिजवा दीं। यहां के अमले ने इन्हीं गाड़ियों से टीके रवाना भी कर दिए।

रायपुर के लिए भी प्राइवेट गाड़ी
स्टेट वैक्सीन स्टोर के सामने, दोपहर 12.20 बजे... रायपुर जिले के पोलियो वैक्सीन ले जाने के लिए एक एंबुलेंस पहुंची। इसमें अलग-अलग ब्लाॅक की वैक्सीन लोड की जाने लगी। इस गाड़ी के ड्राइवर ने भास्कर से कहा कि वैक्सीन वाहन कहीं और खड़ा है, इसलिए इसे लेकर आ गया। गाड़ी कहां और क्यों खड़ी है, उसने यह नबीं बताया। जबकि तकनीकी तौर पर वैक्सीन के लिए खास इंसुलेटेड वाहन ही इस्तेमाल होते हैं।
गरियाबंद की गाड़ी में जगह कम पड़ी
दोपहर 12.55 बजे... पोलियो वैक्सीन ले जाने के लिए गरियाबंद जिले से प्राइवेट एसयूवी पहुंची। इस गाड़ी में पोलियों के साथ-साथ रोटा वायरस समेत दो-तीन और वैक्सीन भेजे जाने थे। वैक्सीन के बाॅक्स रखे जाने लगे और गाड़ी चार डिब्बों में ही भर गई। इस वजह से बाकी टीकों को वहीं छोड़ना पड़ा। इस गाड़ी के साथ पहुंचे लोगों ने बताया कि वहां की वैक्सीन गाड़ी महीनों से कंडम है। इसलिए ऐसी गाड़ियों से काम चल रहा है।

सामान्य वाहन में नहीं ले जा सकते
वैक्सीन को किस तापक्रम पर रखना है, इसका प्रोटोकॉल होता है। इसे दूसरी गाड़ी से ले जाया जाए तो वैक्सीन की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। प्रदेश में हर साल 20 से 30% तक वैक्सीन ऐसी ही गाड़ियों और स्टोरेज में तापमान ज्यादा रहने से खराब हो जाती हैं।
बाहरी तापमान का असर नहीं
वैक्सीन वाहन दो में बाहरी तापमान का असर नहीं होता। वॉक इन कूलर वाली वैक्सीन गाड़ियों में भी तापमान को 2-8 डिग्री तक रखा जा सकता है। दो साल पहले हर जिले में रेफ्रिजरेशन वाले वाहनों का प्रस्ताव बना था। लेकिन यह आगे ही नहीं बढ़ पाया।

"कोरोना वैक्सीन को पहुंचाने के लिए निजी वाहनों का भी उपयोग किया जाएगा, इसके लिए लिस्टिंग की जा चुकी है। करीब तेरह नई गाड़ियां लगेंंगी।"
-डॉ. अमरसिंह ठाकुर, राज्य टीकाकरण अधिकारी

"वैक्सीन वाहनों की मौजूदा स्थिति के बारे में राज्य टीकाकरण अधिकारी ही बता पाएंगे।"
-प्रियंका शुक्ला, स्टेट नोडल, कोरोना वैक्सीन



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Vaccine vehicles could not be collected for polio vaccines, carried in normal vehicles


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