मवेशियों को हटाने हाईकोर्ट के दस आदेश, फिर भी सड़क पर जमे हैं , December 25, 2020 at 05:15AM

दीपेंद्र शुक्ला | सड़क पर आवारा मवेशी से हो रही दुर्घटनाओं के खिलाफ हाईकोर्ट में अब तक 3 जनहित याचिकाएं दायर हो चुकी हैं। अब तक की सुनवाई में हाईकोर्ट ने 10 निर्देश दे चुका है। इसके पालन में प्रशासन ने कुछ दिन कार्रवाई की और फिर भूल गया। कोर्ट के आदेश के पालन में प्रशासनिक कार्रवाई का आलम यह है कि हर सड़क पर मवेशी को भटकने के लिए छोड़ा जा रहा है। सड़कों पर मवेशी मिल रहे हैं। जबकि हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए 27 फरवरी 2020 को मवेशियों पर नियंत्रण के लिए आमजन से सुझाव मंगाया है। साथ ही राज्य शासन को दो सप्ताह में अखबार में सड़क से मवेशी को उठाया जाएगा और पकड़े गए मवेशियों को छुड़ाने पर जुर्माना लिया जाएगा प्रकाशित करने का आदेश दिया था। इसका पालन भी अब तक नहीं हुआ है। सरकार के दावों की हकीकत जानने दैनिक भास्कर ने शहर के 10 सड़कों का जायजा लिया। बाजार हो या हाईवे, पुराने मोहल्ले हों या कॉलोनी क्षेत्र, शहर में एक भी सड़क ऐसी नहीं थी, जहां मवेशी लोगों के लिए परेशानी की वजह बनकर नहीं बैठे हैं। कहीं चार तो कहीं दो। इसका कारण यह है कि नगर निगम केवल दिखावे की कार्रवाई कर रहा है। कभी पकड़ते भी हैं तो उन्हें छोड़ दिया जाता है। आलम यह है कि हाईकोर्ट में याचिका लंबित है और हाईकोर्ट के सामने ही मवेशी भटकते दिख रहे हैं। जबकि कोर्ट ने राज्य के सभी नगर निगमों, पालिकाओं और नगर पंचायतों को पक्षकार बनाकर जवाब मांगा था। न तो मवेशी के सींग में कलर, गले में पट्टा और कान में टैगिंग की गई । न ही गायों का रजिस्ट्रेशन हुआ। अधिवक्ता पलाश तिवारी ने बताया कि मुख्य पक्षकारों के अलावा सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बनी पशु कल्याण मंडल और गौ सोवा आयोग को भी पक्षकार बनाया गया है। अभी तक किसी ने भी जवाब सही से नहीं दिया है।

अंतिम आदेश में कहा अखबार में प्रकाशित कर कार्रवाई करें

  • 9 सितंबर 2015 को हाईकोर्ट ने कहा अफसर एसी कमरों से निकलकर बाहर देखें क्या हो रहा है?
  • 4 नवंबर 2015 को कमिश्नर को तलब किए गए तब उन्होंने जवाब दिया मवेशी पकड़े जा रहे हैं।
  • 6 अप्रैल 2016 को दूसरी जनहित याचिका में हादसों का जिक्र हुआ तो प्रशासन ने कहा कि अव्यवस्था दूर कर रहे हैं।
  • 10 अक्टूबर 2016 को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि सड़क पर नजर रखें, आवारा मवेशी गौशाला में जाएं।
  • 10 अक्टूबर 2016 को किसानों से मवेशियों को सड़कों व सार्वजनिक स्थानों पर नहीं छोड़ने कहा गया।
  • 11 अक्टूबर 2017 को दोबारा मवेशी को गौशालाओं में रखने व किसानों को वे मवेशी ऐसे नहीं छोड़ने कहा।
  • 11 जुलाई 2017 को हाईकोर्ट ने कलेक्टर की अध्यक्षता में कमेटी बनाने और बैठक कर समीक्षा करने कहा।
  • 10 अगस्त 2018 को पूर्व सैनिकों की याचिका पर जिम्मेदारों की भूमिका तय करने व सुविधाएं देने कहा।
  • 29 जुलाई 2019 को सरकार ने कहा आदेश का पालन पूरी तरह से करने और अब कहीं भी आवारा पशु नहीं हैं।
  • 27 फरवरी 2020 को कोर्ट ने अखबार में मवेशियों को उठाने और जुर्माना वसूलने के संबंध में छपवाने कहा।

3 जनहित याचिकाएं दायर हुई
अब तक एक्स डिफेंस ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन, चिरमिरी के राजकुमार मिश्रा और बिलासपुर के संजय रजक ने जनहित याचिका दायर की है। एक्स डिफेंस ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन व अन्य ने 2011 में सड़कों पर मवेशी का मुद्दा कोर्ट में उठाया, तब राज्य शासन से जवाब मांगने पर नगर निगम ने आवारा मवेशियों को गोकुल नगर में शिफ्ट करने मुहिम तो चलाई, लेकिन यह नाकाफी साबित हुई। इसके बाद भी आज लगभग हर सड़क पर आवारा मवेशियों को भटकते देखा जा सकता है। ऐसे मवेशी रात में सड़क हादसों के शिकार हो रहे हैं।

सीधी बात
प्रभाकर पांडेय, निगम आयुक्त, बिलासपुर
सवाल -
गौठान शुरू होने के बाद भी सड़कों पर गाय क्यों घूम रही हैं?
-गौठान में गाय आ रही हैं, शहरी क्षेत्र की जानकारी मुझे नहीं है। हम गोबर से वर्मी कंपोस्ट बनवा रहे हैं।
सवाल - आपकी जिम्मेदारी क्या है?
-गाय आ रही हैं या नहीं यह देखने की जिम्मेदारी हमारी है।कार्रवाई के लिए शहर में गौ पालन करने वालों का पहचान कर रहे हैं
सवाल - गौठान शुरू होने के बाद भी सड़कों पर गाय क्यों घूम रही हैं?
- अभी कुछ समय से कार्रवाई बंद है। गायों को गौठान ले जा रहे हैं और जुर्माना भी कर रहे हैं।
सवाल - गोकुल धाम का लाभ क्यों नहीं मिल रहा?
- गोकुल धाम में पुरान लोग व्यवस्थित हो गए हैं। नए गौ पालकों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
Ten High Court orders to remove cattle, still frozen in road


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3nS3dBt

0 komentar