भोरमदेव शक्कर कारखाने में एथेनॉल प्लांट लगाएगा छत्तीसगढ़ डिस्टीलरीज, पीपीपी मॉडल में देश का पहला संयंत्र होगा , December 30, 2020 at 06:59AM

प्रदेश के बड़े उद्योग समूहों में शुमार छत्तीसगढ़ डिस्टीलरीज कवर्धा स्थित भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाने में एथेनॉल प्लांट लगाएगा। सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत इस कारखाने की स्थापना पर 100 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मौजूदगी में मंगलवार शाम छत्तीसगढ़ डिस्टीलरीज की सहायक इकाई एनकेजे बॉयोफ्यूल और भोरमदेव शक्कर कारखाने ने 30 वर्ष के लिए एक एमओयू पर हस्ताक्षर किये।

एमओयू पर भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना के प्रबंध संचालक भूपेन्द्र ठाकुर तथा छत्तीसगढ़ डिस्टीलरी की ओर से अरण्य केडिया ने हस्ताक्षर किए। बताया गया, 40 केएलपीडी क्षमता के 5 करोड़ 27 लाख रुपए प्रतिवर्ष की निविदा स्वीकार की गई है।

अनुबंध के मुताबिक सहकारी शक्कर कारखाना इस प्लांट के लिए केवल जमीन उपलब्ध कराएगा। संयंत्र का निर्माण डेढ़ से दो वर्ष के भीतर पूरा कर एथेनॉल उत्पादन शुरू करने की योजना है। यह संयंत्र गन्ने से एथेनॉल बनाएगा।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, गन्ना किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए शक्कर कारखानों की आर्थिक कठिनाई के स्थायी निदान के लिए पीपीपी मॉडल से एथेनॉल संयंत्र की स्थापना की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा, पीपीपी मॉडल से एथेनॉल संयंत्र की स्थापना का देश में यह पहला उदाहरण है। उन्होंने कहा, एथेनॉल संयंत्र की स्थापना से छत्तीसगढ़ का देश के बायोफ्यूल उत्पादन में भी महत्वपूर्ण योगदान होगा।

सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा, एथेनॉल संयंत्र लगने से गन्ना किसानों को समय पर गन्ना मूल्य का भुगतान हो पाएगा। वहीं गन्ने की मांग बढ़ने से किसानों को उसका लाभ मिलेगा।

धान से एथेनॉल बनाने के प्लांट के लिए पहले ही हो चुके कई करार

राज्य सरकार धान से एथेनॉल बनाने के प्लांट लगाने की कोशिश में है। राज्य सरकार ऐसी चार कंपनियों के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर कर चुकी है। इन संयंत्रों में प्रतिवर्ष 17 लाख 500 किलोलीटर एथेनॉल उत्पादन का लक्ष्य है। इसके लिए करीब 3 लाख 50 हजार टन धान की जरूरत होगी।



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गन्ने से बनने वाले एथेनॉल का इस्तेमाल बायो डीजल के रूप में होता है। ऐसे तमाम बायोडीजल प्लांट लगाने की कोशिश जारी है।


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