दत्तात्रेय मंदिर में घरों से पहुंचा मक्खन श्रीखंड, इसी से भगवान को भोग चढ़ा और भक्तों में प्रसाद बंटा , December 31, 2020 at 06:54AM

ब्रह्मपुरी स्थित दत्तात्रेय मंदिर में 9 दिनों से चल रहे जयंती महोत्सव का बुधवार को समापन हो गया। इस मौके पर गोपालकाला उत्सव मनाया गया। भगवान को भोग चढ़ाने के लिए महिलाएं अपने-अपने घर से मक्खन-श्रीखंड, आटा-शक्कर समेत 30 तरह की खाद्य सामग्री लेकर मंदिर पहुंचीं थीं। इन्हें मिलाकर प्रसाद बनाया गया जिसे महाआरती के बाद भगवान को भोग में चढ़ाया गया। भक्तों को प्रसाद में भी यही बांटा गया।
दत्तात्रेय जयंती महोत्सव के तहत गोपाल काला उत्सव मनाने की परंपरा 200 साल पुरानी है। दत्तात्रेय मंदिर में हर बार यह आयोजन बड़े स्तर पर होता है, लेकिन इस बार कार्यक्रम बहुत ही सीमित कर दिए गए हैं। बुधवार को महोत्सव के आखिरी दिन श्रीकृष्ण की बाल गोपाल के रूप में पूजा की गई। इस माैके पर मंदिर परिसर में उन्हें झूला भी झुलाया गया। मंदिर के ट्रस्टी हरिवल्लभ अग्रवाल बताते हैं, बुधवार को एक दर्जन महिला मंडलियों ने मंदिर में भजन प्रस्तुत किए। इस दौरान भजनों की ऐसी शमां बंधी कि भक्त भाव विभोर होकर झूमने लगे। उन्होंने बताया कि महिलाएं घर से जो खाद्य सामग्री लाती हैं, गोपालकाला उत्सव पर भगवान को वही भोग चढ़ाया जाता है। इस प्रसाद का विशेष महत्व माना गया है। सैकड़ों साल पहले सामाजिक समरसता के उद्देश्य से इसकी शुरुआत की गई थी। यह कारगर भी रहा। आज सभी वर्ग की महिलाएं साथ मिलकर भगवान की पूजा करती हैं। महाेत्सव में कांत दामले, महेश राम साहू, विनायक राव कांकडे, दिनेश फनसलकर, अनुजा दुबे, विजय दुबे, करुणा मुदंडा, राहुल अग्रवाल, राजेश अग्रवाल, सरला अवस्थी, दिलीप कालेले, मिथिला अग्रवाल, रामकली पांडेय, भागीरथी साहू आदि शामिल हुए।

200 साल में पहली बार भंडारा नहीं हुआ, बांटा गया पैकेटबंद प्रसाद
दत्तात्रेय जयंती महोत्सव के 200 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब भंडारे का आयोजन नहीं किया गया। सचिव चेतन दंडवते ने हर साल 10 हजार से ज्यादा भक्त भंडारे में शामिल होते थे। सभी को परिसर में बिठाकर पत्तल में भोजन कराया जाता था। कोराेना संक्रमण के चलते फिलहाल ऐसा आयोजन संभव नहीं है। इसीलिए हमने यह आयोजन रद्द कर दिया। इसकी जगह श्रद्धालुओं को कतारबद्ध तरीके से खड़ा कर पैकेटबंद प्रसाद बांटा गया। उन्होंने बताया कि 9 दिवसीय महोत्सव में भगवान के दर्शन करने 10 हजार श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।

सुबह दुग्धाभिषेक, दोपहर कथा, शाम को हवन
जयंती महोत्सव पर मंदिर में सुबह 10 बजे आचार्य पं. राजेश शर्मा और पुजारी माधव प्रसाद पाठक ने रूद्र पाठ के साथ भगवान का दुग्धाभिषेक किया। दोपहर में सत्यनारायण कथा हुई। वहीं शाम को हवन के बाद भगवान की आरती की गई। पं. सुबोध मनोहर पांडे ने गुरु ग्रंथ के जन्म अध्याय का पाठ किया जिसके बाद भक्तों ने धूमधाम से जन्म उत्सव मनाया। संगीतमयी आरती के बाद भव्य आतिशबाजी की गई। प्रभु दत्त का विशेष श्रृंगार भी किया गया था। गौरतलब है कि महोत्सsव में छत्तीसगढ़ समेत अन्य प्रदेशों के लोग भी शामिल हुए।



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शाम को बाल गोपाल की महाआरती की गई। इस मौके पर भक्तों ने भगवान काे झूला भी झुलाया।


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