छत्तीसगढ़ के लिए रिजर्व MBBS सीट पर दूसरे राज्य के छात्र ने एडमिशन लिया; बिलासपुर हाईकोर्ट ने जांच के आदेश दिए , December 08, 2020 at 06:20AM

डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए छत्तीसगढ़ के कॉलेजों में एडमिशन में गड़बड़ी की शिकायत सामने आई है। बिलासपुर हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ के लिए रिजर्व MBBS की सीट पर दूसरे राज्यों के छात्रों ने निवास प्रमाणपत्र बनवाकर एडमिशन लिया है। इसके चलते स्थानीय छात्र एडमिशन से वंचित हो गए हैं। मामले में हाईकोर्ट ने राज्य शासन और DME (डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन) को जांच के आदेश दिए हैं।

सिफतपाल सिंह अरोड़ा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर MBBS एडमिशन को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि NEET के लिए आवेदन करते समय बताना होता है छात्र कहां का मूल निवासी हैं। ऐसे कई छात्र हैं जो छत्तीसगढ़ के निवासी रहे हैं, लेकिन अब अन्य राज्य के हैं। इसी का फायदा उठाकर उन्होंने छत्तीसगढ़ का निवास प्रमाण पत्र लगाकर प्रवेश ले लिया है। जबकि राज्य के 2018 के कानून में है कि एडमिशन के लिए छत्तीसगढ़ का मूल निवासी होना अनिवार्य है।

NEET में आवेदन के समय भरे गए निवास को ही मुख्य माना जाता है
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मनोज परांजपे ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट सहित अन्य हाईकोर्ट की ओर से दिए गए फैसले का हवाला देते हुए तर्क प्रस्तुत किया। कोर्ट को यह भी बताया कि NEET के ऑनलाइन आवेदन को भरते समय छात्रों ने जहां का मूल निवासी भरा जाता है उसे ही मुख्य माना जाता है। जबकि कई छात्रों ने राज्य के लिए आरक्षित सीट में भी भर दिया है। इसके लिए वे यहां का निवास प्रमाण पत्र लगा रहे हैं। इससे स्थानीय छात्रों का नुकसान हो रहा है।

दो राज्यों की नागरिकता का लाभ ले रहे, स्थानीय वंचित हो रहे
यह भी बताया है कि यहां का निवास प्रमाण पत्र बनवाना दूसरे राज्यों के अपेक्षा आसान है। ऐसे में दो राज्यों की नागरिकता रखने वाले छात्रों को लाभ मिल रहा है और स्थानीय छात्र अधिकार से वंचित हो रहे हैं। कोर्ट से यह भी मांग किया कि ऐसे छात्रों के निवास को मान्य न किया जाए। जो आवेदन में जहां का निवासी बताए हैं उन्हें वहीं का माना जाए। शासन के तरफ से कहा गया कि इस मामले को लेकर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। स्थानीय छात्रों को प्राथमिकता दी जाएगी।

काउंसलिंग के समय और NEET में जमा दस्तावेजों का मिलान किया जाए
सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने DME को निर्देशित किया है कि वे काउंसिलिंग के वक्त मूल निवास के दस्तावेज की जिसमें डिक्लेरेशन दिया हो उसकी जांच करें। इसका मिलान NEET में जमा किए गए दस्तावेज से किया जाए। इससे स्थानीय लोगों को लाभ मिले। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन और जस्टिस पीपी साहू की बेंच में हुई।

छत्तीसगढ़ के कॉलेजों में MBBS की 85 फीसदी सीटें स्थानीय छात्रों के हैं रिजर्व
छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेजों में MBBS की 85 फीसदी सीटें राज्य के छात्रों के लिए आरक्षित होती हैं। वहीं 15 फीसदी केंद्र के लिए होती है। सरकार की ओर से कहा गया, राज्य के छात्रों के लिए आवंटित सीट पर हुई काउंसलिंग में दूसरे राज्यों के NEET पास छात्र को प्रवेश दिए जाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। राज्य के लिए आवंटित 85 फीसदी सीटों पर स्थानीय छात्रों के प्रवेश की प्रक्रिया हो इसकी व्यवस्था की जा रही है।



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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एमबीबीएस में एडमिशन को लेकर नीट और काउंसलिंग में जमा किए गए दस्तावेजों की जांच के आदेश दिए।


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