ई कामर्स कंपनी का कर्मी बन शिक्षक खाते से ऑनलाइन निकाले 21 लाख रु. , January 05, 2021 at 05:38AM

लैलूंगा के एक रिटायर्ड शिक्षक के खाते से ठगों ने 21 लाख रुपए ऑनलाइन निकाल लिए। ठगी के तीन दिन बाद शिकायत पुलिस और बैंक प्रबंधन से की तो उन्होंने उसके खाते से 5 लाख रुपए को पार होने से बचा लिए। बदमाशों ने खुद को स्नेपडील का कर्मी बताकर शिक्षक को फोन किया था। पुलिस ने अज्ञात ठग के विरुद्ध मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार सुखसागर निकुंज 63 साल निवासी हाई स्कूलपारा रिटायर्ड शिक्षाकर्मी है। उन्हें पहली बार 29 दिसंबर को कथित स्नेपडील से फोन आया था। फोन पर उन्हें इनाम देने का झांसा देकर एकाउंट की सारी जानकारी मांग ली गई। इसके बाद खाते से 21 लाख रुपए का ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कर लिया गया। ये रुपए तीन दिनों के भीतर में निकाल लिए। पीड़ित परिवार को जब तक इसकी भनक लगी तब तक खातों से रुपए निकल चुके थे। पीड़ित परिवार ने इसकी सूचना बैंक में दी तो बैंक ने 5 लाख रुपए को होल्ड करा दिया गया। पुलिस के अनुसार वह आरोपियों को पकड़ने में लगी हुई है।

ओटीपी किसी से शेयर न करें
पुलिस और बैंक दोनों का ही ये मानना है कि यदि व्यक्ति अपना ओटीपी ना शेयर करे तो बैंक खाते से पैसे निकलने का चांस लगभग समाप्त हो जाता है। इसके बाद भी कई तरह से पैसे निकाले जा सकते हैं, लेकिन बिना ओटीपी के बैंक जल्दी से पैसे ट्रांसफर नहीं करती। जिले में आज तक जितने भी मामले हुए हैं, उनमें अधिकतर मामलो में पीड़ित ने ठगों को मोबाइल में आए ओटीपी की जानकारी दे दी। उसी का लाभ लेकर आरोपी खातों से ऑनलाइन पैसे निकाल लिए और ठगी होने के बाद उसका पता चला।

अलर्ट नोटिफिकेशन ऑन रखें
आजकल ऑनलाइन वॉलेट एप पर मनी रिक्वेस्ट की सुविधा उपलब्ध है। यानी आपको कोई भी पेमेंट करने के लिए रिक्वेस्ट भेज सकता है। इसके बाद बस एक क्लिक करने पर आपके अकाउंट से उस अकाउंट में पैसे चले जाएंगे। सभी वॉलेट एप पर अलर्ट नोटिफिकेशन की सुविधा उपलब्ध है। जब भी कोई आपके वॉलेट एप में लॉगिन करने की कोशिश करेगा तो आपको अलर्ट नोटिफिकेशन आएगा, संदेह होने पर आप परमिशन देने से इनकार भी कर सकते हैं।

कुकीज को डिलीट करना न भूलें
जब भी आप ब्राउजर, जैसे- क्रोम व मोजिला के जरिए पेमेंट करते हैं तो आपसे सिस्टम कुकीज इनेबल करने कहता है। बगैर इसके आप पेमेंट कर भी नहीं सकते। जब आप कुकीज इनेबल करते हैं तो आपकी डिटेल कोडिंग की भाषा में ब्राउजर के सर्वर पर सेव हो जाती है। अगर आप ट्रांजेक्शन के बाद कुकीज डिलीट नहीं करते हैं, तो हैकर्स के लिए आपकी डिटेल निकालना आसान हो जाता है। इसलिए ब्राउजर के जरिए जब भी पेमेंट करें ब्राउजर की सेटिंग में जाकर कुकीज डिलीट करना न भूलें।

ठगी होने के बाद भी ऐसे बच सकते हैं नुकसान से
आरबीआई की गाइडलाइन के मुताबिक धोखाधड़ी की सूचना देनेे के बाद ट्रांजेक्शन की पूरी जिम्मेदारी बैंक पर होती है। यदि तय समय में संबंधित बैंक को सूचना नहीं दी गई तो जिम्मेदारी उपभोक्ता की होती है। इस स्थिति में बैंक पर रिफंड करने की कानूनी बाध्यता लागू नहीं होती। धोखाधड़ी के शिकार होने पर बैंक के संबंधित अधिकारी को सूचना दें। इसके अलावा कस्टमर केयर सेंटर पर शिकायत दर्ज कराएं करा सकते हैं।



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प्रतीकात्मक फोटो।


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