रमन सिंह का राज्य सरकार पर हमला- कांग्रेस ने केंद्र सरकार से पूछकर नहीं की थी 2500 में धान खरीदने की घोषणा, सरकार का पलटवार- अपने बूते ही खरीद रहे हैं, केंद्र अड़ंगा न लगाए , January 05, 2021 at 09:52AM

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को लेकर राज्य और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक हितों का टकराव जारी है। छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को धान का मूल्य 2500 रुपया प्रति क्विंटल देने का दावा कर रही है। इसके लिए उसने राजीव गांधी किसान न्याय योजना चला रखी है जिसमें किसानों को प्रति एकड़ 10 हजार देने की व्यवस्था है। केंद्र सरकार इसे बोनस मान रही है, जिसपर वहां से रोक लगी हुई है।

हंगामा तब मचा जब एक महीने की खरीदी के बाद भी केंद्र सरकार ने एक दाना चावल भी सेंट्रल पूल में नहीं लिया। ऐसी हालत में राज्य के खरीदी केंद्रों पर धाम जाम हो गया और खरीदी प्रभावित हुई। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री से फोन पर बात कर हस्तक्षेप करने को कहा। अब पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है, कांग्रेस ने केंद्र सरकार से पूछकर धान का दाम प्रति क्विंटल 2500 रुपया देने की घोषणा की नहीं थी। अब वह केंद्र सरकार की मदद क्यों चाहती है। वहीं प्रदेश के वन, आवास एवं पर्यावरण मंत्री तथा राज्य सरकार के प्रवक्ता मोहम्मद अकबर ने कहा है, राज्य सरकार अपने बूते ही किसानों से धान खरीद रही है। केंद्र सरकार इसमें अड़ंगा न लगाए।

डॉ. रमन सिंह ने कहा, प्रदेश सरकार ने 2500रुपए में धान खरीदने की घोषणा केंद्र सरकार से तो पूछकर की नहीं थी। अब समर्थन मूल्य के अलावा किसानों को जो राशि प्रदेश सरकार दे रही है, वह योजना भी केंद्र सरकार से पूछकर नहीं बनाई थी। बोनस संबंधी केंद्र सरकार की नीति के बारे में इनको पहले से पता था। इसके बावजूद राज्य सरकार केंद्र के खिलाफ बयानबाजी कर रही है। रमन सिंह ने कहा, ऐसे बयानों से केंद्र की नीतियां नहीं बदला करतीं।

डॉ. रमन सिंह ने कहा, अब तो प्रदेश सरकार को अपना वादा पूरा करना चाहिए। ये लोग इधर-उधर की बातें बनाकर किसानों से किए वादे से बचने की कोशिश न करें। प्रदेश सरकार अपने वादे के मुताबिक 2500 रुपया प्रति क्विंटल की दर से किसानों का धान खरीदे। केंद्र सरकार अपनी ओर से यथासंभव इसमें सहयोग करेगी। डॉ. रमन सिंह ने कहा, आज तक छत्तीसगढ़ के किसानों को पिछले वर्ष के धान का पूरा भुगतान नहीं मिला है। यह आरोप मैंने विधानसभा में लगाया था और अभी भी अपनी उस बात पर कायम हूं।

वन, आवास एवं परिवहन मंत्री व राज्य सरकार के प्रवक्ता मोहम्मद अकबर ने रमन सिंह के आरोपों पर तीखा पलटवार किया है। मोहम्मद अकबर ने कहा, इस मामले में कांग्रेस कोई राजनीति नहीं कर रही है। राजनीति और षड़यंत्र भाजपा का है। उन्होंने कहा, केंद्र सरकार ने 60 लाख मीट्रिक टन चावल लेने की सहमति दी थी। जब खरीदी शुरू हो गई तो केंद्र सरकार के रुख में परिवर्तन आया है।

मोहम्मद अकबर ने कहा, हम हर हाल में किसानों को 2500 रुपए प्रति क्विंटल का मूल्य देंगे। कांग्रेस तो इसे स्वीकार कर रही है। उन्होंने कहा, पिछले साल समर्थन मूल्य 1815 रुपया प्रति क्विंटल की दर से खरीदी हुई। शेष 685 रुपए की राशि राजीव गांधी किसान न्याय योजना के जरिए दी गई। उन्होंने कहा, राज्य सरकार अपने बूते ही धान खरीद रही है, अब केंद्र सरकार इसमें ऐसे अड़ंगे न लगाए।

समितियों में जाम हो गया है धान: रमन सिंह

समितियों में धान जाम हो गया है। अफसरों और मुख्यमंत्री को समझ नहीं आ रहा है कि इस धान को लिफ्ट कर संग्रहण केंद्रों तक पहुंचाया जाना चाहिए। इन केंद्रों की क्षमता 35 लाख मीट्रिक टन है। अभी तक 02 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा धान संग्रहण केंद्रों तक नहीं पहुंचा है। हमारे शासनकाल में बफर लिमिट कभी 10 फीसदी से अधिक नहीं हुआ। आज बफर स्टॉक 66 फीसदी तक है।

चावल जमा होगा तब तो खाली होंगी समितियां: मोहम्मद अकबर

इस बार 90 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान खरीदी का लक्ष्य है। केंद्र सरकार ने 60 लाख मीट्रिक टन चावल लेने की सहमति दी थी। खरीदी शुरू होने के एक महीने बाद तक उन्होंने एक दाना चावल भी जमा करने की अनुमति नहीं दी थी। रविवार को 24 लाख मीट्रिक टन चावल के लिए अनुमति मिली है। चावल जमा होगा तो 2306 खरीदी केंद्रों से धान के उठाव में तेजी आएगी।

इधर खरीदी केंद्रों पर सामान्य होने लगे हालात

इस बीच धान खरीदी केंद्रों पर हालात सामान्य होने लगे हैं। प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति, भाठागांव के प्रभारी डीएन इंदौरिया ने बताया, उनके यहां खरीदी प्रभावित नहीं हुई है। धान का उठाव भी समय-समय पर हो रहा है। इस समिति ने अभी तक 103 किसानों से 3 हजार 67 क्विंटल धान खरीदा है। इसमें से 1480 क्विंटल धान संग्रहण केंद्रों को चला गया है। इस केंद्र से धान की आखिरी खेप एक जनवरी को गई थी।

खाद्य विभाग ने बताया, 04 जनवरी तक 54 लाख 65 हजार 420 मीट्रिक धान की खरीदी हो चुकी थी। इसे 13 लाख 92 हजार 458 किसानों से खरीदा गया है। कस्टम मिलिंग े लिए 17 लाख 33 हजार 886 मीट्रिक टन धान का डीओ जारी हो चुका है। वहीं मिलरों ने 14 लाख 10 हजार मीट्रिक टन धान का उठाव कर लिया है।

विवाद की जड़ में धान का दाम

केंद्र और राज्य सरकार के बीच पूरा विवाद धान की कीमत से जुड़ा हुआ है। पूर्ववर्ती भाजपा सरकार धान उत्पादक किसानों को प्रति क्विंटल 300 रुपया बोनस देती थी। यह समर्थन मूल्य के अतिरिक्त था। 2015 में केंद्र की भाजपा सरकार ने अनाज उत्पादन पर बोनस देने से मना कर दिया। उनका कहना था, राज्यों ने बोनस दिया तो केंद्र उनका चावल नहीं लेगा। ऐसे में तत्कालीन भाजपा सरकार ने बोनस बंद कर दिया। किसानों का घाटा महसूस हुआ और आंदोलन शुरू हो गए। विधानसभा चुनाव से एक साल पहले वोटबैंक का हवाला देकर भाजपा यह नियम शिथिल कराने में सफल रही। 2017-18 में किसानों को बोनस दिया गया।

इधर कांग्रेस ने किसानों से वादा किया कि वह सत्ता में आई तो प्रति क्विंटल 2500 में धान खरीदेंगे। यह बात असर कर गई। भारी बहुमत से कांग्रेस की सरकार बनी। 2500 रुपए में खरीदी की नीति बनी। पहले वर्ष खरीदी में कोई परेशानी नहीं आई। दूसरे वर्ष केंद्र सरकार ने बोनस की स्थिति में चावल लेने से साफ इन्कार कर दिया। कई दौर की बातचीत के बाद भी हालात नहीं सुधरे तो राज्य सरकार ने राजीव गांधी किसान न्याय योजना नाम से इनपुट सहायता योजना शुरू की। इसके तहत किसानों को प्रति एकड़ 10 हजार रुपए नकद राशि दी जाती है। केंद्र सरकार इसे भी बोनस मान रही है।

ऐसे समझिए धान खरीदी का पूरा गणित

दरअसल समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी केंद्र सरकार करती है। लेकिन यह राज्यों के जरिये किया जाता है। केंद्र सरकार ही तय करती है कि खरीदी किस तरह के बोरे में की जाएगी, मिलिंग कैसे होगी। उसे अरवा चावल चाहिए या उसना चावल। छत्तीसगढ़ में मार्कफेड के जरिए यह खरीदी होती है। सरकार सहकारी समितियों के जरिए किसानों से धान खरीदती है। मार्कफेड समर्थन मूल्य 1868 रुपए की दर से उसका भुगतान करता है। बाद में उसकी मिलिंग कर चावल एफसीआई में जमा कर दिया जाता है। केंद्र सरकार समर्थन मूल्य की दर से पूरी खरीदी का भुगतान राज्य सरकार को वापस कर देती है। राज्य सरकार समर्थन मूल्य और अपने वादे के मूल्य 2500 रुपए प्रति क्विंटल में अंतर की राशि किसान न्याय योजना के तहत किस्तों में जारी करती है।

अब तक क्या हुआ

  • 01 दिसम्बर से धान की सरकारी खरीदी शुरू हुई। 90 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य तय हुआ है।

  • 21 दिसम्बर को विपक्ष ने विधानसभा में बारदाना संकट और धान खराब होने के आरोप लगाए। जांच कराने की मांग की।

  • 26 दिसम्बर को कई खरीदी केंद्रों पर किसानों ने हंगामा किया। कई जगहों पर प्रदर्शन।

  • 29 दिसम्बर को धान जाम होने की स्थिति में कई खरीदी पर खरीदी बंद रखने का नोटिस चस्पा हुआ।

  • 30 दिसम्बर को मुख्यमंत्री ने मंत्रियों के साथ आपात बैठक कर हालात की समीक्षा की। कहा- केंद्र सरकार चावल जमा करने की अनुमति नहीं दे रही।

  • 31 दिसम्बर को 6 मंत्रियों ने किसान प्रतिनिधियों से चर्चा कर वस्तुस्थिति की जानकारी दी, सहयोग मांगा।

  • 31 दिसम्बर को ही मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात कर हस्तक्षेप की मांग की। भाजपा ने राज्य सरकार पर पिछले वर्ष का बकाया चावल जमा नहीं कर पाने का आरोप लगाया।

  • 01 जनवरी को केंद्रीय खाद्य मंत्री पीयूष गोयल ने मुख्यमंत्री से बात कर पूछा कि कहीं आप किसानों को बोनस तो नहीं दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि धान खरीदी को प्रभावित करने के लिए रमन सिंह और प्रदेश भाजपा षड़यंत्र कर रहे हैं।

  • 01 जनवरी को ही केंद्र सरकार ने एफसीआई को पत्र लिखकर पिछले साल के बकाया चावल का स्टॉक जांचने को कहा। सात दिनों में रिपोर्ट मांगी।

  • 03 जनवरी को भाजपा की प्रदेश प्रभारी डी. पुरंदेश्वरी ने प्रदेश सरकार पर केंद्र से मिले 9 हजार करोड़ रुपए के बंदरबांट का आरोप लगाया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम ने आरोपों को झूठा बताया।

  • 03 जनवरी को ही केंद्र सरकार ने 24 लाख मीट्रिक टन चावल केंद्रीय पूल के लिए जमा करने की अनुमति जारी कर दी। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को धन्यवाद कहा। भाजपा ने कहा, सरकार धान खरीदी से बचने का बहाना ढूंढ रही है।



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धान की इस राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष की ओर से रोज तीखे आरोप लगाए जा रहे हैं। इस बीच किसान अपनी फसल और उसके लाभकारी मूल्य को लेकर परेशान है।


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