मां ठीक से निहार भी नहीं पाई थी कि बेटे के जन्म के नौ घंटे में ही मौत की खबर आ गई, 4 साल की बहन तो चेहरा भी नहीं देख पाई , January 09, 2021 at 07:33PM

जिले के आसपास के 10 गांवों में अब मातम पसरा है। शनिवार को जिला अस्पताल में हुई आगजनी की वजह से 10 नवजात शिशुओं की मौत हो गई। ये सभी बच्चे अस्पताल के सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट(SNCU)में रखे गए थे। शुक्रवार- शनिवार देर रात लगभग 2 बजे के आसपास अस्पताल के इस यूनिट में शार्ट सर्किट से यह आग लगी थी। इस यूनिट में 17 बच्चे रखे गए थे। जिनमें से 7 की जान बचा ली गई। जिन 10 परिवारों ने अपने नवजात बच्चों को खोया अब वहां सिर्फ आंसू और गम का माहौल है।


बेटे को ठीक से देख भी नहीं पाई थी मां
भंडारा जिले के श्रीनगर गांव में रहने वाले विकेश शिवदास धूड़से मजदूर हैं और हादसे से तकरीबन 9 घंटे पहले यानी शुक्रवार दोपहर को उनकी पत्नी योगिता ने एक बेटे को जन्म दिया था। बच्चे का वजन कम होने की वजह से पैदा होते ही परिजन उसे जिला अस्पताल लेकर आए और SNCU में एडमिट करवा दिया। योगिता अपने बच्चे को ठीक से निहार भी नहीं पाई थी और बच्चा उनसे इतनी दूर चला गया कि अब वह कभी लौट कर नहीं आएगा।

विकेश की 4 साल की बेटी भाई के आने से बेहद खुश थी। उसने तो अपने अपने भाई का चेहरा भी नहीं देखा था।

जन्म की खुशी मनाने की जगह अब कर रहे मातम की तैयारी
विकेश की 4 साल की बेटी के भाई के आने से बेहद खुश थी। परिवार में सभी के चेहरों पर मुस्कान थी। शुक्रवार को खुशी के मारे विकेश ने मिठाइयां बांटी, लेकिन उसकी खुशी कुछ ही घंटे में मातम में बदल गई। अब मां-पिता के आंसू रोके नहीं रुक रहे हैं। विकेश ने बताया कि उसके परिवार को उम्मीद थी कि जल्द ही उनका बेटा ठीक हो कर वापस घर लौट आएगा। बेटे के जन्म की खुशी मनाने की जगह अब वे उसके अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे हैं।


जल्द घर आने वाली थी बिटिया
भंडारा जिले से लगे हुए भोजापुर गांव के रहने वाले विश्वनाथ बहरे की बेटी का इलाज पिछले 1 महीने से जिला हॉस्पिटल में चल रहा था। विश्वनाथ ने बताया, 'बेटी का वजन कम होने की वजह से इलाज के लिए उसे अस्पताल में दाखिल कराया गया था, लगभग 1 महीने से उसका इलाज यहां चल रहा था और अब उसे छुट्टी दी जाने वाली थी। बेटी की सेहत में लगातार सुधार था। इस बात से हम सभी बेहद खुश थे। शनिवार को दो घंटे की देरी के बाद हमें सुबह 4:00 बजे हादसे के बारे में जानकारी दी गई।'

स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे एक पीड़ित परिवार को मुआवजे का चेक सौंपते हुए।

परिवार पूछ रहा-क्या 5 लाख रुपए में लौट आएगी बेटी?
विश्वनाथ ने बताया, 'जब हम अस्पताल पहुंचे तब तक हमें किसी ने यह नहीं बताया कि हमारी बेटी की मौत हो चुकी है। कुछ देर बाद अस्पताल के कुछ कर्मचारियों ने इस बात का खुलासा किया। महाराष्ट्र के विधानसभा अध्यक्ष नाना पटोले भोजापुर गांव पहुंचे और विश्वनाथ के परिवार से मुलाकात कर उन्हें मुआवजे का चेक सौंपा, लेकिन परिवार मायूसी भरे चेहरे में यही पूछ रहा है कि क्या यह 5 लाख लौटा सकते हैं उनकी बच्ची को?



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शुक्रवार को खुशी के मारे विकेश ने मिठाइयां बांटी, लेकिन उसकी खुशी कुछ ही घंटे में मातम में बदल गई।


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