पार्वती को पहला टीका, डिकेश्वरी टीके के बाद बीमार, फगनी को वैक्सीन ही नहीं लगी , January 03, 2021 at 05:46AM

कोरोना वैक्सीन के पुरानी बस्ती सरस्वती स्कूल स्थित टीकाकरण सेंटर में मॉक ड्रिल के दौरान शनिवार को बिलकुल वही सीन था जैसा टीकाकरण शुरू होने के दौरान रहेगा। सुबह 10 बजे सेंटर के बाहर लाइन लग गई। पहला टीका स्वास्थ्य कार्यकर्ता पार्वती नेताम को लगाया गया। दूसरा टीका डिकेश्वरी साहू को लगा लेकिन थोड़ी ही देर बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई।

तुरंत ही उसे एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया। इस बीच फगुनी लहरा भटकती मिली। उसके मोबाइल पर टीकाकरण करवाने का मैसेज आया लेकिन सेंटर की लिस्ट में उसका नाम ही नहीं था। इस वजह से उसे टीका नहीं लगाया गया। मॉकड्रिल के दौरान ऐसी हर स्थिति का ट्रायल किया गया जो टीकाकरण के दौरान पैदा हो सकती है।

वैक्सीन का जिस बेसब्री से इंतजार है स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन उतनी ही तगड़ी तैयारी कर रहा है। शनिवार को रायपुर में सरस्वती नगर स्कूल, तिल्दा में मिशन अस्पताल व मंदिरहसौद के सरकारी स्कूल को टीकाकरण केंद्र बना मॉक ड्रिल हुई। वहां 75 लोगों को टीके लगवाने के मैसेज भेजे। सरस्वतीनगर सेंटर में 3 हेल्थ वर्करों के साथ जो हुआ वो उन्हीं की जुबानी...

ऐसी चेकिंग तो कभी नहीं हुई, पर सब आसानी से हो गया

खोखोपारा अस्पताल की नर्स पार्वती नेताम को सबसे पहला टीका लगा। पार्वती ने बताया मोबाइल पर मैसेज आने के बाद से मैं उत्साहित थी। खुशी इस बात की थी कि टीका लगने के बाद मेरे साथ मेरे परिवार को कोरोना का खतरा कम हो जाएगा। इसलिए सुबह साढ़े 9 बजे ही सेंटर पहुंच गई। गेट पर पहले पहचान पत्र दिखाने को कहा गया। वहीं लिस्ट में मेरा नाम चेक हुआ।

लिस्ट में नाम देखकर पुलिस के जवानों ने सैनिटाइजर से हाथ सैनिटाइज करवाया। उसके बाद भीतर एंट्री दी। वहां एक कक्ष में लैपटॉप में सॉफ्टवेयर के जरिए फिर मेरा नाम चेक किया गया। मेरे पहले किसी और का नाम था, लेकिन वह 10.40 तक नहीं पहुंची। इसलिए मुझे रूम नंबर-2(जहां टीके लगाए जाने थे) पर बुलाया गया।

टीके लगने के दस मिनट बाद मुझे घबराहट और चक्कर आने लगे

अस्पताल में शिफ्टिंग

एएनएम डिकेश्वरी साहू ने बताया वैक्सीन लगाने के बाद मुझे कक्ष-3 में भेज दिया गया। वहां डाक्टर बैठे थे। मैं वहां बाकी लोगों के साथ बैठ गई। थोड़ी देर बाद मुझे चक्कर और घबराहट आने लगी। मैंने वहां मौजूद मेडिकल स्टाफ को बताया कि मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा है। मेरी कंप्लेंट सुनते ही डाक्टर और नर्स ने मेरा बीपी चेक किया। वहीं लेटने को कहा गया। थोड़ी देर में 108 एंबुलेंस पहुंच गई।

मुझे अस्पताल ले जाया गया। वहां डाक्टरों की टीम मौजूद थी। थोड़ी देर बाद मेरी स्थिति में सुधार हो गया। डिकेश्वरी भले ही तबीयत बिगड़ने की एक्टिंग कर रही थी, लेकिन पूरा सीन इस तरह चला जैसे सही में टीकाकरण के बाद उसकी तबीयत बिगड़ी है। ऐसा इसलिए किया ताकि टीकाकरण के बाद साइड इफेक्ट होने पर कैसे अस्पताल पहुंचाएं।

मोबाइल पर मैसेज आया पर सेंटर की लिस्ट में नहीं, इसलिए भटकती रही

लिस्ट से नाम गायब

टीकाकरण सेंटर में भटक रही हेल्थ वर्कर फगनी लहरे ने बताया मोबाइल पर मैसेज आने के बावजूद मुझे वैक्सीन नहीं लगायी गई। उसने मोबाइल दिखाते हुए कहा, मुझे मैसेज आया है। मैंने कई बार अपना मोबाइल सॉफ्टवेयर आपरेट को दिखाया पर वे नहीं मानें। बार-बार कहा कि लिस्ट में नाम नहीं है। इसलिए टीका नहीं लगेगा। फगनी ने कहा- मैसेज आया तो खुश हो गई।

कोरोना का भय दूर हो जाएगा लेकिन यहां तो परेशान हो गई। मेरी कोई सुनने वाला नहीं है। एंट्री गेट पर पुलिस जवान से कई देर तक बहस की तब साॅफ्टवेयर कक्ष में प्रवेश मिला। पर यहां भी राहत नहीं मिली। दरअसल, इस तरह की स्थिति को भी परखकर देखा गया कि अगर किसी व्यक्ति का नाम एंट्री प्वांइट पर हो लेकिन सॉफ्टवेयर में नहीं तब क्या करना है। क्या नहीं?

प्रैक्टिस के दौरान जो खामियां सामने आई, उन्हें सुधारा जाएगा। टीका लगने की सूचना सॉफ्टवेयर डेस्क तक पहुंचाने के लिए पर्ची सिस्टम बनाएंगे।
शम्मी आबिदी, जिला कोरोना वैक्सीनेशन नोडल अधिकारी



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ऐसे लगा पहला टीका


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