न्याय योजना पर केंद्र की शंका दूर करने का जिम्मा सीएस को , January 03, 2021 at 05:47AM

छत्तीसगढ़ में न्यूतनम समर्थन मूल्य पर धान खरीदी 1 दिसंबर से शुरू की गई है। 31 जनवरी तक सरकार ने कुल 90 लाख टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा है, लेकिन एफसीआई द्वारा धान का उठाव नहीं किए जाने से सरकार की चिंता बढ़ गई है। सीएम भूपेश बघेल ने इस मामले में पीएम नरेंद्र मोदी और खाद्यमंत्री पीयूष गोयल से बातचीत भी की है। इस मामले में सीएम भूपेश बघेल ने मुख्य सचिव से कहा है कि केन्द्र शासन से समय लेकर इस योजना की पूरी जानकारी देकर वस्तुस्थिति स्पष्ट कर दी जाए।

दरअसल, धान खरीदी को लेकर उठे विवाद के बीच मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शनिवार को खुद सामने आए। उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया है कि हम किसानों से धान की खरीदी 25 सौ रुपए में नहीं बल्कि केन्द्र द्वारा जारी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर ही कर रहे हैं। लेकिन हम अंतर का राशि का भुगतान राजीव गांधी किसान न्याय योजना के माध्यम से कर रहे हैं।

दरअसल, केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू की गई राजीव गांधी किसान न्याय योजना को लेकर शुरू से ही कड़ा रुख अख्तियार किया हुआ है। इस संबंध में केन्द्र सरकार राज्य शासन से पहले ही इस योजना की पूरी जानकारी मंगा चुका है। वहीं एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और केन्द्रीय खाद्य मंत्री पीयूष गोयल के बीच हुई बातचीत में भी गाेयल ने सीएम से किसानों को धान बोनस देने के संबंध में जानकारी चाही थी।

हालांकि सीएम ने कहा कि वे बोनस नहीं दे रहे हैं बल्कि उनके द्वारा जिस तरह किसानों को सम्मान निधि के नाम पर पैसे दिए जा रहे हैं, ठीक वैसे ही छत्तीसगढ़ में राजीव गांधी किसान न्याय योजना के माध्यम से किसानों को मदद पहुंचा रहे हैं। सीएम ने कहा कि हमारे यहां के अधिकारी दिल्ली जाकर इस योजना की जानकारी देंगे उन्होंने उम्मीद जताई है कि बातचीत से बीच का रास्ता जरूर निकलेगा।

अब तक 53 लाख टन धान की खरीदी

प्रदेश में अब तक 52 लाख 64 हजार 330 मीट्रिक धान की खरीदी की गई है तथा 13 लाख 47 हजार 270 किसान अपना धान बेच चुके हैं। मिलरों को 15 लाख 40 हजार 584 मीट्रिक टन धान का डीओ जारी किया गया है। इसके विरुद्ध मिलरों द्वारा 12 लाख 39 हजार 270 मीट्रिक टन धान का उठाव कर लिया गया है।

राज्य की चिंता इसलिए

प्रदेश में पिछले खरीफ सीजन में कुल 83 लाख टन धान की खरीदी की गई थी। इस बार यह लक्ष्य 85 से 90 लाख टन का रखा गया है। राज्य में लगभग 38 से 40 लाख टन धान की खपत होती है, एफसीआई लगभग 35 लाख टन धान का उठाव करती थी। लेकिन उठाव नहीं होने से राज्य के पास कुल 45 से 50 लाख टन धान अधिक हो जाएगा।

केंद्र की आपत्ति इसलिए

दरअसल केन्द्र सरकार का कहना है कि यदि काेई राज्य न्यूनतम समर्थन मूल्य से ज्यादा कीमत पर धान खरीदेगा तो वह राज्य सरकार से धान का उठाव नहीं करेगा। इस बार भी कमोबेश यही स्थिति निर्मित हो रही है। इस बार केन्द्र को आपत्ति इसी बात से है कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य से ज्यादा कीमत पर किसानों से धान खरीद रही है।

किसानों को गुमराह कर रहे रमन

15 साल सीएम रहे रमन इस तरह का बयान क्यों दे रहे हैं यह अब समझ आया। क्योंकि वे नहीं चाहते है कि किसानों को लाभ मिले। रमन और भाजपा नेता किसानों को गुमराह कर रहे हैं।

-भूपेश बघेल, सीएम

केंद्र सरकार से आश्वासन मिला

एफसीआई से धान का उठाव करने के लिए सीएम ने पीएम मोदी और पीयूष गोयल से बात की है। बातचीत से रास्ता जरूर निकलेगा। केंद्र से आश्वासन मिला है।

-मोहम्मद अकबर, प्रवक्ता, छत्तीसगढ़ सरकार



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कांकेर के बागोड़ार में उठाव नहीं होने से खरीदी केंद्र में जाम पड़ा है धान।


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