किसानों को रबी फसल के लिए नहीं मिलेगा जलाशयों से पानी , January 03, 2021 at 05:58AM

रबी फसल की सिंचाई के लिए अभी से जलसंकट खड़ा हो गया है। प्रमुख जलाशयों में पानी का स्टॉक इतना नहीं है कि रबी फसल की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जा सके। इसके चलते सिंचाई के लिए जलाशय से पानी नहीं देने का निर्णय लिया है। तांदुला जलाशय में पानी की कमी है और खपरी जलाशय में भी यही दिक्कत है। वहीं नहरों से पानी छोड़ने के दौरान पानी की और ज्यादा बर्बादी ज्यादा होगी।

जिले में पिछले साल 21343 हेक्टेयर में रबी फसल की बुवाई की गई थी। इस साल किसानों ने 51600 हेक्टेयर में रबी फसल बुवई की है, जिसमें किसानों ने ग्रीष्मकालीन धान, गेंहू, चना, सरसों, अरहर, मक्का, उड़द, मूंग फसल की बुवाई की गई है।

इसमें से धान, गेंहूू और चना फसल के लिए जलाशय से पानी की जरूरत पड़ती हैं। जनपद पंचायत दुर्ग ने भी रबी फसल के दौरान पानी की बर्बादी का हवाला देते हुए शासन को रबी फसल में पानी नहीं देने का प्रस्ताव भेजा है। फसल के लिए पानी देने से निस्तारी और पेयजल के लिए पानी कमी हो जाती है। इसलिए इस तरह का निर्णय लिया गया है। किसानों को इस बार राहत नहीं मिलेगी।

जानिए, विभाग जलाशयों से क्यों नहीं दे पा रहे पानी

तांदुला जलाशय की क्षमता 302.31 एमसीएम पानी की है। यहां अभी 52.34 प्रतिशत पानी का स्टॉक है। 45% पेयजल के लिए होता है। शेष 10% पानी नहरों के आसपास इलाके में फैलकर बर्बाद हो जाता है। खपरी जलाशय में 82.70% पानी है। जलाशय से 400 हेक्टेयर में लगे रबी फसल सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाता है। इसमें कम पानी बचा है।

इस तरह होती है खरीफ फसलों में पानी की खपत

धान, गेंहूू व चना ग्रीष्मकालीन फसल है। अधिकारियों के मुताबिक गेंहूू फसल तैयार होने तक एक फीट पानी चाहिए। चना फसल के लिए 9 इंच पानी और धान के लिए 90 सेंटीमीटर पानी की जरूरत पड़ती है। खरीफ फसल की तुलना में इन ग्रीष्मकालीन फसलों को चार से पांच बार पानी मिलने से यह तैयार होता है। इसलिए रबी फसल को 10गुना ज्यादा पानी देते हैं।

बचत पानी के आधार पर तैयार किया जाता है प्लान

रबी फसलों को नहरों से सिंचाई पानी देने हर साल जलाशयों में बचत पानी के आधार पर प्लान तैयार होता है। लेकिन यह पहला मौका है, जब प्लान अभी तक नहीं बनाया गया है। जबकि अफसरों का कहना है कि जलाशयों में इस बार बचत पानी बेहद कम है। रबी फसल को पानी दिया जो जिलेभर में पेयजल व निस्तारी की समस्या आ जाएगी।

नदी से रेडियस वाटर कर सकते हैं सप्लाई

तांदुला जलाशय से रबी फसल के लिए पानी नहीं मिलेगा। वहीं, जनपद पंचायत ने भी शासन को रबी फसल में पानी नहीं देने का प्रस्ताव भेजा है। ऐसे में जानकारों का कहना है कि, शिवनाथ नदी का रेडियस वाटर उद्योगों के लिए अनुबंधित था। अनुबंध समाप्त हो गया है। नदी किनारे बसे गांव को पानी को रेडियस वाटर के रूप में पानी उपलब्ध कराने का विकल्प तैयार किया जा सकता है।

जलाशयों में पानी कम

जलाशयों में पानी की कमी है। इसलिए रबी फसल को पानी देने से पेजयल और निस्तारी की समस्या आएगी।
बीजी तिवारी, ईई जलसंसाधन विभाग

पानी की बर्बादी होती है

रबी फसल के लिए नहर से पानी छोड़ने पर काफी पानी बर्बाद होता है। इसकी वजह से गांव के तालाबों को भर नहीं पाते। हैंडपंपों का वाटर लेबल ऊपर नहीं आता।
देवेन्द्र देशमुख, अध्यक्ष जपं दुर्ग



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धमधा के माटरा निवासी नारायण साहू की चने की फसल पानी के कमी से बर्बाद हो गई।


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