विधायक निधि का पैसा दूसरे विधानसभा क्षेत्र के लोगों को मिला , January 04, 2021 at 06:02AM

मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में जिन लोगों का नाम दूर-दूर तक नहीं है वहां विधायक द्वारा जारी जनसंपर्क राशि का पैसा पहुंचा दिया गया है। यह गड़बड़ी तहसील स्तर की है, जिसके बाद ही यूको बैंक ने चेक से बाहर के दो लोगों के अकाउंट में पैसे जमा किए हैं। जिसे देखने के बाद मस्तूरी विधायक ने खुद ही इस त्रुटि को सुधारने और जरूरतमंदों को उनका पैसा पहुंचाने की बात लिखी है। उन्होंने कलेक्टर को चेक क्रमांक देकर मामले में सुधार के निर्देश दिए हैं। विधायक कृष्णमूर्ति बांधी ने 29 नवंबर 2020 को दो लोगांे को जनसंपर्क राशि बतौर पांच-पांच हजार रुपए देने की बात लिखी है। जिन लोगों को पैसे देने थे उनमें मंजीत कुमार साहू पिता आनंद राम साहू और लोहर्सी निवासी सनत दुबे पिता रामजी दुबे शामिल हैं। इनकी जगह पर जनसंपर्क राशि का पैसा बलराम गिरी गोस्वामी पिता बिपत गिरी गोस्वामी और मनीष कुमार सोण्डे पिता आशाराम सोण्डे को पहुंच गया है। यह पैसा यूको बैंक से चेक क्रमांक 000516 और 000157 के जरिए पहुंचा गया। बाद में जब इसकी सूचना विधायक बांधी को लगी तो वे हैरत में पड़ गए। इसके बाद उन्होंने कलेक्टर बिलासपुर को चिट्‌ठी लिखकर 24 दिसंबर 2020 को इसमें सुधार करने और पैसे को सही व्यक्ति और उनके पते पर भेजने की बात लिखी। अभी मामले में सुधार का काम जारी है। अधिकारियों ने इसकी प्रक्रिया बढ़ा दी है।

जिन्होंने पूरा कर्ज पटाया, उन्हें बना दिया कर्जदार
सहकारी बैंक ने पहले तो महिला टिकेश्वरी का नाम टाकेश्वर कर दिया। फिर बाद में इसके सुधार की चिट्ठियां चलीं। इसका नतीजा यह रहा कि महिला किसान के पंजीयन का काम प्रभावित हुआ। दूसरी तरफ उन्हें बैंक के चक्कर लगाने पड़े। यह गलती उनके पति की मृत्यु के बाद उनका नाम चढ़ाने में हुई थी। किसान समस्या का निदान इंवेट में सहकारी बैंक बिलासपुर के अधिकारियों को इस गड़बड़ी का पता लगा। टाकेश्वरी के पति पवन कुमार का निधन दो साल पहले हो गया था। उन्होंने धुव्राकारी समिति को सारा कर्ज पटा भी दिया था, फिर भी इनका नाम कर्ज लेने वालों की श्रेणी में आता रहा। इसकी जानकारी के बाद इस मामले में भी सुधार की बात कही जा रही है।

राजस्व विभाग से हो रही गड़बड़ी: नामों में गड़बड़ी का यह दौर राजस्व विभाग से शुरू हो रहा है। ज्यादातर गलतियां पटवारी स्तर से सामने आ रही है। ऑनलाइन सर्वे में नामों को गलत दर्ज करने का नतीजा ही बाद में लोगों को भुगतना पड़ रहा। इसकी शिकायतें भी हो रही हैं, पर ऑनलाइन सिस्टम में जल्द सुधार नहीं होने की बात कहकर लोगों को चलता कर दिया जा रहा है। जिसके चलते ही लोग परेशान हैं।



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