बिलासपुर हाईकोर्ट ने कहा- जहां जुर्माने का प्रावधान, वो केस आपराधिक न्यायालय के क्षेत्राधिकार में नहीं , January 11, 2021 at 09:32AM

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अमानक खाद्य पदार्थों के मामले में बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा है कि जहां जुर्माने का प्रावधान हो, उस केस को आपराधिक न्यायालय में नहीं चलाया जा सकता। हाईकोर्ट ने अमानक खोवा मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JFMC) कोर्ट अकलतरा में प्रस्तुत चालान को खारिज कर दिया। मामले की सुनवाई जस्टिस संजय के. अग्रवाल की एकलपीठ में हुई।

बिलासपुर के खोवा व्यापारी अभिषेक गुप्ता ने अधिवक्ता अमन उपाध्याय के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इसमें बताया गया कि याचिकाकर्ता को JFMC अकलतरा ने आरोप पत्र दिया है, जो नियमानुसार सही नहीं है। सुनवाई के दौरान प्रश्न उठा कि क्या खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 की धारा 26(2) (ii) के अंतर्गत किए गए अपराध के लिए कोई दांडिक आरोप पत्र पेश किया जा सकता है?

कोर्ट ने कहा- नहीं प्रस्तुत किया जा सकता है आरोप पत्र
सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 की धारा 26 (2) (ii) के अंतर्गत अपराध किए जाने के लिए कोई आरोप पत्र प्रस्तुत नहीं किया जा सकता है। इसके लिए अधिनियम की धारा 68 (ऐसे खाद्य पदार्थ जिनसे जान का नुकसान न हो) के तहत विशेषकर प्राधिकारी की ओर से जुर्माना लगाया जा सकता है। मामले की सुनवाई जस्टिस संजय के. अग्रवाल की एकलपीठ में हुई।

खाद्य सुरक्षा में दो तरह के अपराध
हाईकोर्ट ने कहा, खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत दो प्रकार के अपराध आते हैं। वे सभी अपराध जो केवल जुर्माना से दंडित होते हैं, ऐसे मामले प्राधिकारी द्वारा सुनवाई किए जा सकते हैं। इनमें आपराधिक कोर्ट का क्षेत्राधिकार नहीं होता है। वहीं कारावास सजा वाले आपराधिक कोर्ट के क्षेत्राधिकार में आते हैं। हालांकि हाईकोर्ट में यह बात नहीं आई कि किस-किस श्रेणी के अपराध किस-किस धारा के अंतर्गत दंडनीय है।

अब आगे ये : खाद्य सुरक्षा की कार्रवाई तीन कोर्ट में होगी प्रस्तुत
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत होने वाली कार्रवाई को तीन न्यायालयों में प्रस्तुत किया जाएगा।

  • जुर्माना योग्य मामले न्याय निर्णयन प्राधिकारी के समक्ष
  • तीन साल से कम की सजा वाले मामले JFMC
  • तीन साल से ज्यादा के सजा वाले मामले विशेष न्यायालय में सुने जाएंगे

ये है मामला
मुकाम मेसर्स केवट होटल बलौदा को याचिकाकर्ता ने बेचने के लिए 20 किलो खोवा दिया था। इस खोवा में से 2 किलो खोवा 26 जुलाई 2017 को खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत जांच के लिए लिया गया था। 9 अगस्त 2017 को खाद्य विश्लेषक की रिपोर्ट के अनुसार जांच के लिए भेजा गया खोवा उपयोग के लिए मानक गुणवत्ता का नहीं मिला। जिससे इसे अमानक घोषित किया गया।



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अमानक खाद्य पदार्थ मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब मामलों की सुनवाई तीन अलग-अलग कोर्ट में होगी।


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