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रायगढ़ का कार्यकाल हमेशा रहेगा खास : भीम सिंह – Vision News Service


कलेक्टर को जिला प्रशासन की ओर से दी गई विदाई

रायगढ़ (वीएनएस)। छत्तीसगढ़ शासन के आदेशानुसार जिले से स्थानांतरित कलेक्टर भीम सिंह को जिला प्रशासन परिवार की ओर से कलेक्ट्रेट सृजन सभाकक्ष में आयोजित कार्यक्रम में भावभीनी विदाई दी गई। इस अवसर पर उन्हें स्मृति चिन्ह भेंटकर उपस्थित अधिकारी-कर्मचारियों ने उनके अगले पदस्थापना के लिए शुभकामनाएं दीं।

निवृत्तमान कलेक्टर भीम सिंह ने इस मौके पर अपने संबोधन में कहा कि रायगढ़ का दो साल का कार्यकाल हमेशा खास रहेगा। उन्होंने इस दौरान अनुभव साझा करते हुए कहा कि जिला कलेक्टर के रूप में हमेशा से उनकी प्राथमिकता रही कि शासकीय योजनाओं का प्रभावी रूप से क्रियान्वयन हो तथा अंतिम व्यक्ति तक उसका लाभ पहुंचे। इस बीच कोरोना के कारण प्रशासनिक कामकाज में भी कई प्रकार की चुनौतियां आयी। लेकिन सभी अधिकारी-कर्मचारियों की टीम भावना व सहयोग से जिले के नागरिकों के लिए व्यवस्थाओं का संचालन संभव हो सका और रायगढ़ जिला शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में प्रदेश में शीर्ष स्थानों पर काबिज रहा। कोविड के दौरान लोगों के लिए ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था करना एक बड़ी चुनौती रही। ऑक्सीजन सिलेण्डर तो पर्याप्त मात्रा में मिल रहे थे, लेकिन इस सिलेण्डर के साथ ही लगाये जाने वाले फ्लोमीटर की पूरे देश में किल्लत चल रही थी। ऐसे में दूसरे राज्यों में पदस्थ अपने बैचमेट्स से संपर्क साधकर तथा स्थानीय स्तर पर लोगों के सहयोग से फ्लोमीटर तैयार कर व्यवस्था सुनिश्चित किया गया। इसी प्रकार कोविड वैक्सीनेशन को लेकर भी लोगों में भी भ्रांतियां थी, उसे दूर करते हुए वैक्सीनेशन का लक्ष्य पूर्ण करने के लिए पूरी टीम सटीक रणनीति के साथ जी-जान से जुटी रही और जिसके सकारात्मक परिणाम दिखे और हम प्रदेश में सबसे पहले अपना लक्ष्य पूरा कर सके। स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए पिछले दो सालों में 20 करोड़ रुपये खर्च किए गए। जिससे आवश्यक संसाधन व मैनपॉवर जुटाये जा सके। कुपोषण मुक्ति के लिए भी जिले में काफी काम किया गया। उन्होंने बताया कि जब उनकी पदस्थापना हुयी तो कुपोषण 20 प्रतिशत से अधिक था जो अब घटकर 7 प्रतिशत रह गया है। इसी के साथ शासन की फ्लेगशिप योजनाओं में वर्मी कम्पोस्ट निर्माण व विक्रय में भी जिला प्रदेश में शीर्ष पर रहा। कृषि, वन अधिकार पत्र वितरण, माहवारी स्वच्छता व आजीविका संवर्धन से जुड़ी गतिविधियों को भी लगातार बढ़ावा दिया गया। इस दौरान उन्होंने मीडिया शासन की योजनाओं तथा प्रशासनिक प्रयासों को लोगों तक पहुंचाने में सहयोग के लिए बहुत-बहुत आभार जताया। उन्होंने कहा कि मीडिया के माध्यम से लोगों को सूचनाएं मिली जिससे वे कोविड वैक्सीनेशन में शामिल हुए और विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने के लिए जागरूक हुए।

जिला प्रशासन की ओर से सीईओ जिला पंचायत अबिनाश मिश्रा ने कहा कि उन्हें काफी अल्प समय साथ में काम करने का मौका मिला, किन्तु दूसरे जिलों में पदस्थ पदस्थापना के दौरान भी कलेक्टर भीम सिंह के कार्यों से लगातार प्रेरणा मिलती रही। नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा ने अपने अनुभव बांटते हुए बताया कि कलेक्टर सिंह के नेतृत्व में धरमजयगढ़ क्षेत्र में कार्य करने का मौका मिला। जहां स्वास्थ्य के साथ-साथ अन्य योजनाओं की मॉनिटरिंग तथा उसका बेहतर क्रियान्वयन में लगातार कलेक्टर सिंह से मार्गदर्शन मिलता रहा। अपर कलेक्टर आर.ए.कुरूवंशी ने कहा कि कलेक्टर सिंह के मार्गदर्शन में राजस्व के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य जिले में हुआ है। जिसमें शासन की योजनाओं को हम प्रभावी तरीके से क्रियान्वित कर सकें। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.केशरी ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में कलेक्टर सिंह के नेतृत्व में हुए कार्य तथा उनसे मिले अनुभवों को साझा किया। तो वहीं जिला शिक्षा अधिकारी ने शिक्षा के क्षेत्र में किए गए इनोवेशन मुख्यमंत्री युवा केन्द्र व कोरोना के समय ऑनलाईन पढ़ाई में जिले की उपलब्धि को कलेक्टर सिंह के मार्गदर्शन में किए गए प्रयास बताया।

एसडीएम सारंगढ़ राजीव पाण्डेय, एसडीएम घरघोड़ा डिगेश पटेल, एसडीएम रायगढ़ गगन शर्मा, तहसीलदार तमनार माया अंचल ने भी इस मौके पर कलेक्टर सिंह के साथ किए कार्यों के अनुभव बांटे। इस दौरान एसडीएम खरसिया अभिषेक गुप्ता, एसडीएम लैलूंगा रात्रे, ज्वाईंट कलेक्टर दुष्यंत रायस्त, ज्वाईंट कलेक्टर अभिलाषा पैकरा, ज्वाईंट कलेक्टर डॉ.स्निधा तिवारी, डिप्टी कलेक्टर पी.के.गुप्ता, डिप्टी कलेक्टर रोहित सिंह, डिप्टी कलेक्टर शिव कंवर, महिला एवं बाल विकास कार्यक्रम अधिकारी टी.के.जाटवर, ईई पीएचई परीक्षित चौधरी, उप संचालक माईनिंग चंद्राकर, स्टेनो टू कलेक्टर आर.के.स्वर्णकार, अधीक्षक राजेश मेहरा सहित अन्य विभागों के जिला अधिकारी व कलेक्ट्रेट के कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

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परिवहन विभाग ने की यात्री बसों की संयुक्त चेकिंग ,परमिट शर्तो का उल्लंघन एवं अन्य वाहन पर 1 लाख 44 हज़ार रुपए शुल्क की वसूली। – छ.ग.का नंबर 1 न्यूज़ पोर्टल


सरायपाली/जनसंवाद/विकास नंद/
आज शुक्रवार 19 अगस्त को परिवहन अधिकारी, महासमुंद, उड़न दस्ता, रायपुर एवं परिवहन चेक पोस्ट, खम्हारपाली के साथ मिलकर यात्री बसों की संयुक्त चेकिंग कार्यवाही की। परिवहन आयुक्त, रायपुर के निर्देशानुसार कार्रवाई को अंजाम दिया।
ज़िला परिवहन अधिकारी आर.के.ध्रुव ने बताया कि कुछ दिनों से मिल रही शिकायतों के चलते यह कार्रवाई की गयी। रायपुर सरायपाली मार्ग पर अधिक किराया, बिना परमिट, बिना फिटनेस, बिना टैक्स, बिना बीमा के संचालित वाहनों पर कार्यवाही की गयी। परमिट शर्तो का उल्लंघन करते पाये जाने पर कुल 24 वाहनों से कुल 49,300 रूपए समझौता शुल्क वसूल किया गया है। इसके अलावा 01 वाहन का मोटर यान कर बकाया होने के कारण छत्तीसगढ़ मोटर यान कराधान अधिनियम 1991 की धारा 16 (3) के तहत जप्त कर पुलिस थाना, तुमगांव की अभिरक्षा में वाहन खड़ी की गई थी। वाहन स्वामी द्वारा बकाया मोटरयान कर 39,000 रूपए जमा करने के पश्चात वाहन को मुक्त किया गया। सभी को भविष्य के लिए हिदायत दी गयी।
कार्रवाई के दौरान 2 वाहनों से 10,000 रूपए समझौता शुल्क वसूल किया गया। बिना बीमा के संचालित 01 वाहन पर कार्यवाही करते हुए 5000 रूपए समझौता शुल्क वसूल किया गया। अधिक किराया वसूल करते पाये जाने पर 3 वाहनों के विरूद्ध कार्यवाही करते हुए 15,000 रूपए समझौता शुल्क वसूल किया गया। अन्य अपराध के तहत कुल 18 वाहनों के विरूद्ध कार्यवाही करते हुए कुल 19,300 रूपए समझौता शुल्क वसूल किया गया। इस तरह कुल 24 वाहनों से कुल 49,300 रूपए समझौता शुल्क वसूल किया गया है।
इसी प्रकार 01 स्कूल बस क्रमांक सीजी 04 एमवाय 4907 का मोटर यान कर बकाया होने के कारण 8000 रूपए जमा कराकर वाहन मुक्त किया गया। 01 ओव्हर लोड मालयान पर कार्यवाही करते हुए 48,000 रूपए समझौता शुल्क वसूल किया गया है।

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विधायक ने कृष्ण कुंज में किया पौधारोपण। – छ.ग.का नंबर 1 न्यूज़ पोर्टल


सरायपाली/जनसंवाद/विकास नंद/
उपाध्यक्ष अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण व स्थानीय विधायक किस्मत लाल नंद ने भगवान श्री कृष्ण की पूजा अर्चना के साथ ही जन्माष्टमी के पावन अवसर पर कृष्ण कुंज में कंदब का पौधरोपण किया सरायपाली से भंवरपुर मार्ग पर बने कृष्ण कुंज में 1.5 हेक्टेयर भूमि पर 900 नग पौधे रोपित किए गए हैं जिसमें बरगद, पीपल, कंदब, जैसे सांस्कृतिक महत्व के पौधे लगाए गए कृष्ण कुंज में जीवनपयोगी आम, इमली, बेर, गंगा ईमली, जामुन, शहतूत, तेंदू , चिरौंजी के पौधे लगाए गए हैं बता दें कि प्रदेश के सभी नगरीय क्षेत्रों में 162 स्थानो के कृष्ण कुंज में पौधरोपण किया गया है वृक्षारोपण को जन जन से जोड़ने सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए कृष्ण कुंज का नाम दिया गया है इस अवसर पर नगर पालिका अध्य्क्ष अमृत लाल पटेल, वन विभाग के वन परिक्षेत्र अधिकारी आर. एल. व्यवहार, सिंघोड़ा बीट से संतोष कुमार पैकरा, सर्कल आफिसर सुरेश पाणिग्राही, सतीश कुमार पटेल, आकाश बेहरा, अनिल प्रधान, दिनेश प्रधान, बैजनाथ बारिक, मीना पटेल, पुरुषोत्तम साव, चंद्रशेखर सिदार, मुकेश निषाद, राकेश पटेल, सुनील जमींदार, शुभम तिवारी, कुलेश्वर डडसेना, प्रेम प्रकाश कुर्रे, सहित समस्त वन कर्मचारी एवं दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी तथा नगर के गणमान्य नागरिकगण, जनप्रतिनिधि, कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहें।

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कोविड में डोलो की मांग क्यों इतना बढ़ी, जानिए वजह !


रायपुर। कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान देश के हेल्थ सिस्टम को सबने देखा और उस दौरान सरकारों पर भी सवाल उठे और हेल्थ सिस्टम को फेल होता देख लोगों ने अपने स्तर पर खुद ही कुछ जरूरी दवाईयों का इंतजाम कर लिया था औऱ इन्हीं में से एक दवा थी डोलो 650। इसके बारे में डॉक्टर भी कहते थे कि बुखार की स्थिति में डोलो खाते रहिए।  क्योंकि सांस लेने में तकलीफ होने की समस्या के अलावा दूसरी लहर के दौरान बुखार भी एक बड़ी समस्या थी । लोगों को बराबर दवाईयां खाने के बाद भी हफ्तों तक बुखार नहीं जाता था।  दर्द और बुखार की दवा डोलो 650 ने बिक्री के मामले में क्रोसिन को पीछे छोड़ दिया।

बता दे कि पूरे भारत देश में इन 12 महीनो में ही डोलो टेबलेट की 400 करोड़ की बिक्री हुई है। मार्च 2020 से दिसंबर 2021 तक  कोरोना महामारी के इस 20 महीनों में 567 करोड़ रुपए की 350 करोड़ डोलो टैबलेट की बिक्री हुई हैं…राजधानी रायपुर में सामान्य समय पर 10 से 12 लाख की बिक्री होती थी लेकिन कोविड के समय में 45 से 50 लाख की बिक्री हुई है।

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देसी ब्रांड है डोलो 650

डोलो एक देशी ब्रांड है और डॉक्टर भी इस दवाई पर काफी भरोसा दिखा रहे हैं। जिस बुखार औऱ दर्द से राहत के लिए डोलो इस्तेमाल होती है उसी के लिए बाजार में जीएसके की कॉलपॉल औऱ क्रोसिन जैसी दवाईयां भी मौजूद हैं ।

वहीं अलग-अलग मेडिकल संचालकों का मानना है कोविड के समय में सबसे ज्यादा सर्दी खांसी बुखार की दवा की मांग बढ़ी जिसे अच्छे-अच्छे कंपनियों ने दवा की पूर्ति नहीं कर पाई लेकिन डोलो 650 दवा की सप्लाई जारी रखी और लोगों को आसानी से दवा मिलने लगी जिससे इसकी मांग सामान्य दिनों की अपेक्षा 4 गुना बढ़ी है।

साइड इफेक्ट्स मिनिमम

बुखार के लिए सालों से पैरासिटामॉल सबसे कारगर दवा है। ये बुखार जल्द कम करती है। इसके साइड इफेक्ट्स मिनिमम हैं। ये बच्चों से लेकर बुजर्गों तक को आराम से दी जा सकती है। डोलो टैबलेट की पापुलैरिटी पर डॉ. राकेश गुप्ता का कहना हैं कि इसकी दो बड़ी वजह हैं। पहला तो इस दवा का नाम जुबान पर चढ़ जाता है और ये हर जगह आसानी से अवेलेबल है। इसके कॉम्पिटीटर्स पायरीजेसिक, पैसिमॉल, फेपानिल और पैरासिप वगैरह हैं, जो बोलने और लिखने में कठिन हैं। दूसरी वजह  ये दवा 650 mg में आती है  जिस वजह से इसका असर देर तक रहता है। इसलिए तेज बुखार में डॉक्टर इसे ज्यादा प्रिस्क्राइब करते है।

डोलो ने क्रोसिन को रिप्लेस किया

कोरोना लहर में डॉक्टर ने जमकर डोलो प्रिस्क्राइब किया। एक दूसरे की देखा-देखी लोग खुद भी मेडिकल स्टोर जाकर डोलो 650 खरीदने लगे। यानी  ओवर द काउंटर मेडिसिन में डोलो ने क्रोसिन को रिप्लेस कर दिया और महज 20 महीने में बिक्री के रिकॉर्ड तोड़ दिए। जनवरी 2020 में कोरोना महामारी आने के बाद गूगल पर 2 लाख से ज्यादा लोगों ने ‘Dolo 650’ कीवर्ड सर्च किया है। इस तरह डोलो 650 भारत की दूसरी सबसे ज्यादा बिकने वाली एंटी-फीवर दवा बन गई।

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