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युवाओं को परंपरागत पद्धति और नई तकनीक के मध्य सामंजस्य स्थापित करते हुए आगे बढ़ना होगा: राज्यपाल सुश्री उइके


रायपुर, 01 जुलाई 2022 : राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके आज श्री रावतपुरा सरकार विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में शामिल हुई। उन्होंने इस अवसर पर देश के प्रसिद्ध अंतरिक्ष वैज्ञानिक डॉ. के. कस्तूरीरंगन, प्रसिद्ध पंडवानी गायिका श्रीमती तीजनबाई, प्रसिद्ध आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. राजेश कोटेचा तथा पूर्व न्यायाधीश अशोक भूषण को मानद उपाधि से सम्मानित किया।

साथ ही राज्यपाल ने 25 विद्यार्थियों को अपने संकाय में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए स्वर्ण पदक तथा 1 हज़ार 142 विद्यार्थियों को उपाधि और पत्रोपाधि प्रदान की। इस अवसर पर श्री रावतपुरा सरकार विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री रविशंकर महाराज, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत, केन्द्रीय राज्यमंत्री खाद्य प्रसंस्करण एवं जल शक्ति प्रह्लाद पटेल, छत्तीसगढ़ के खाद्यमंत्री अमरजीत भगत, स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ.प्रेमसाय सिंह टेकाम एवं सांसद रायपुर सुनील सोनी उपस्थित थे।

राज्यपाल सुश्री उइके ने दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए मानद उपाधि से सम्मानित विशिष्टजनों और उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के साथ-साथ हम सभी के लिए गौरव की बात है कि देश के विकास में सर्वोत्कृष्ट योगदान देने वाले विद्वतजनों को सम्मान स्वरूप मानद उपाधि दी गई है। आप सभी विद्यार्थियों को इन विद्वानों का अनुसरण करना चाहिए कि जीवन में किस प्रकार परिश्रम कर लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आज के दौर में युवाओं को परंपरागत पद्धतियों और नई तकनीकों के मध्य सामंजस्य स्थापित करते हुए आगे बढ़ना होगा।

राज्यपाल सुश्री उइके ने कहा कि दीक्षांत समारोह वह स्वर्णिम अवसर है जिसका आप सभी विद्यार्थी अपने अध्ययन काल के समय से ही प्रतीक्षा कर रहे होते हैं। यही प्रतीक्षा आज परिणाम में परिणित हुई है और आपको प्राप्त हुई उपाधियों ने आपके लिए असीम संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। राज्यपाल ने कहा कि अब आप अपनी इच्छानुरूप सेवा का अवसर चुन सकते हैं, किन्तु आपको मानव कल्याण के उद्देश्य को सर्वोपरि रखकर कार्य करना होगा। यही उपयुक्त समय है जब आप अपने देश व समाज को कुछ लौटाने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि एक बेहतर संस्थान से पढ़ाई पूरा करने के बाद आपका दायित्व है कि आप देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें और राष्ट्र निर्माण में सहयोग दें। यहां से प्रशिक्षित एवं दीक्षित विद्यार्थी भारतीय ज्ञान परंपरा को आत्मसात् कर अपने क्षेत्र में प्रतिष्ठा अर्जित करें और भारतीय संस्कृति एवं मूल्यों का संरक्षण भी करें।

राज्यपाल सुश्री उइके ने कहा कि जहां तकनीक, दुनिया को समय से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है, वहीं परंपरागत शिक्षा पद्धतियां स्थायित्व पर जोर देती हैं। भारत में बौद्धिकता और अनुभव की विशाल संपदा है, युवाओं को इसका भरपूर उपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी केवल डिग्री प्राप्त करना ही अपना उद्देश्य न मानें, बल्कि व्यावहारिक ज्ञान अर्जित करें और उत्कृष्ट आचार-विचार और संस्कार को अपने जीवन में आत्मसात करें। राज्यपाल ने संबोधन के अंत में दीक्षांत समारोह के गरिमामय आयोजन के लिए विश्वविद्यालय प्रबंधन को बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने उपाधि प्राप्तकर्ताओं को शुभकामनाएं दी और कहा कि आप सभी ने विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त की है और अब दीक्षित होकर सामाजिक जीवन में प्रवेश कर रहे हैं। आप किसी भी क्षेत्र से जुड़े हों, आपको अपना उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए देश व प्रदेश के विकास में अपनी भागीदारी निभाएं और गुरूओं के सम्मान की परंपरा का सदा निर्वाह करें।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय राज्यमंत्री खाद्य प्रसंस्करण एवं जल शक्ति श्री प्रह्लाद पटेल ने कहा कि आपने शिक्षा प्राप्त कर ली है और आज आपकी दीक्षा पूरी हुई है। सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि आज आप सभी को अपना संकल्प तय करना है। आप सभी को जीवन में कठिन व सुविधाजनक रास्ते मिलेंगे। आपको कठिन रास्ता चुनना होगा, जिससे आप तेजस्वी बनेंगे और सफल हो पाएंगे। केन्द्रीय मंत्री श्री पटेल ने कहा कि आपका लक्ष्य जितना दूर है, आपको अपनी गति उतनी ही तेज करनी है। अवसरों से चूकना नहीं है, अवसरों के लिए सतर्क रहना है।

इस मौके पर विश्वविद्यालय प्रबंधन ने सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह प्रदाय कर सम्मानित किया। इस अवसर पर दीक्षित होने वाले वाले छात्र-छात्राएं एवं उनके परिजन, विश्वविद्यालय के प्राध्यापकगण उपस्थित थे।

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परिवहन विभाग ने की यात्री बसों की संयुक्त चेकिंग ,परमिट शर्तो का उल्लंघन एवं अन्य वाहन पर 1 लाख 44 हज़ार रुपए शुल्क की वसूली। – छ.ग.का नंबर 1 न्यूज़ पोर्टल


सरायपाली/जनसंवाद/विकास नंद/
आज शुक्रवार 19 अगस्त को परिवहन अधिकारी, महासमुंद, उड़न दस्ता, रायपुर एवं परिवहन चेक पोस्ट, खम्हारपाली के साथ मिलकर यात्री बसों की संयुक्त चेकिंग कार्यवाही की। परिवहन आयुक्त, रायपुर के निर्देशानुसार कार्रवाई को अंजाम दिया।
ज़िला परिवहन अधिकारी आर.के.ध्रुव ने बताया कि कुछ दिनों से मिल रही शिकायतों के चलते यह कार्रवाई की गयी। रायपुर सरायपाली मार्ग पर अधिक किराया, बिना परमिट, बिना फिटनेस, बिना टैक्स, बिना बीमा के संचालित वाहनों पर कार्यवाही की गयी। परमिट शर्तो का उल्लंघन करते पाये जाने पर कुल 24 वाहनों से कुल 49,300 रूपए समझौता शुल्क वसूल किया गया है। इसके अलावा 01 वाहन का मोटर यान कर बकाया होने के कारण छत्तीसगढ़ मोटर यान कराधान अधिनियम 1991 की धारा 16 (3) के तहत जप्त कर पुलिस थाना, तुमगांव की अभिरक्षा में वाहन खड़ी की गई थी। वाहन स्वामी द्वारा बकाया मोटरयान कर 39,000 रूपए जमा करने के पश्चात वाहन को मुक्त किया गया। सभी को भविष्य के लिए हिदायत दी गयी।
कार्रवाई के दौरान 2 वाहनों से 10,000 रूपए समझौता शुल्क वसूल किया गया। बिना बीमा के संचालित 01 वाहन पर कार्यवाही करते हुए 5000 रूपए समझौता शुल्क वसूल किया गया। अधिक किराया वसूल करते पाये जाने पर 3 वाहनों के विरूद्ध कार्यवाही करते हुए 15,000 रूपए समझौता शुल्क वसूल किया गया। अन्य अपराध के तहत कुल 18 वाहनों के विरूद्ध कार्यवाही करते हुए कुल 19,300 रूपए समझौता शुल्क वसूल किया गया। इस तरह कुल 24 वाहनों से कुल 49,300 रूपए समझौता शुल्क वसूल किया गया है।
इसी प्रकार 01 स्कूल बस क्रमांक सीजी 04 एमवाय 4907 का मोटर यान कर बकाया होने के कारण 8000 रूपए जमा कराकर वाहन मुक्त किया गया। 01 ओव्हर लोड मालयान पर कार्यवाही करते हुए 48,000 रूपए समझौता शुल्क वसूल किया गया है।

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विधायक ने कृष्ण कुंज में किया पौधारोपण। – छ.ग.का नंबर 1 न्यूज़ पोर्टल


सरायपाली/जनसंवाद/विकास नंद/
उपाध्यक्ष अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण व स्थानीय विधायक किस्मत लाल नंद ने भगवान श्री कृष्ण की पूजा अर्चना के साथ ही जन्माष्टमी के पावन अवसर पर कृष्ण कुंज में कंदब का पौधरोपण किया सरायपाली से भंवरपुर मार्ग पर बने कृष्ण कुंज में 1.5 हेक्टेयर भूमि पर 900 नग पौधे रोपित किए गए हैं जिसमें बरगद, पीपल, कंदब, जैसे सांस्कृतिक महत्व के पौधे लगाए गए कृष्ण कुंज में जीवनपयोगी आम, इमली, बेर, गंगा ईमली, जामुन, शहतूत, तेंदू , चिरौंजी के पौधे लगाए गए हैं बता दें कि प्रदेश के सभी नगरीय क्षेत्रों में 162 स्थानो के कृष्ण कुंज में पौधरोपण किया गया है वृक्षारोपण को जन जन से जोड़ने सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए कृष्ण कुंज का नाम दिया गया है इस अवसर पर नगर पालिका अध्य्क्ष अमृत लाल पटेल, वन विभाग के वन परिक्षेत्र अधिकारी आर. एल. व्यवहार, सिंघोड़ा बीट से संतोष कुमार पैकरा, सर्कल आफिसर सुरेश पाणिग्राही, सतीश कुमार पटेल, आकाश बेहरा, अनिल प्रधान, दिनेश प्रधान, बैजनाथ बारिक, मीना पटेल, पुरुषोत्तम साव, चंद्रशेखर सिदार, मुकेश निषाद, राकेश पटेल, सुनील जमींदार, शुभम तिवारी, कुलेश्वर डडसेना, प्रेम प्रकाश कुर्रे, सहित समस्त वन कर्मचारी एवं दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी तथा नगर के गणमान्य नागरिकगण, जनप्रतिनिधि, कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहें।

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कोविड में डोलो की मांग क्यों इतना बढ़ी, जानिए वजह !


रायपुर। कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान देश के हेल्थ सिस्टम को सबने देखा और उस दौरान सरकारों पर भी सवाल उठे और हेल्थ सिस्टम को फेल होता देख लोगों ने अपने स्तर पर खुद ही कुछ जरूरी दवाईयों का इंतजाम कर लिया था औऱ इन्हीं में से एक दवा थी डोलो 650। इसके बारे में डॉक्टर भी कहते थे कि बुखार की स्थिति में डोलो खाते रहिए।  क्योंकि सांस लेने में तकलीफ होने की समस्या के अलावा दूसरी लहर के दौरान बुखार भी एक बड़ी समस्या थी । लोगों को बराबर दवाईयां खाने के बाद भी हफ्तों तक बुखार नहीं जाता था।  दर्द और बुखार की दवा डोलो 650 ने बिक्री के मामले में क्रोसिन को पीछे छोड़ दिया।

बता दे कि पूरे भारत देश में इन 12 महीनो में ही डोलो टेबलेट की 400 करोड़ की बिक्री हुई है। मार्च 2020 से दिसंबर 2021 तक  कोरोना महामारी के इस 20 महीनों में 567 करोड़ रुपए की 350 करोड़ डोलो टैबलेट की बिक्री हुई हैं…राजधानी रायपुर में सामान्य समय पर 10 से 12 लाख की बिक्री होती थी लेकिन कोविड के समय में 45 से 50 लाख की बिक्री हुई है।

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देसी ब्रांड है डोलो 650

डोलो एक देशी ब्रांड है और डॉक्टर भी इस दवाई पर काफी भरोसा दिखा रहे हैं। जिस बुखार औऱ दर्द से राहत के लिए डोलो इस्तेमाल होती है उसी के लिए बाजार में जीएसके की कॉलपॉल औऱ क्रोसिन जैसी दवाईयां भी मौजूद हैं ।

वहीं अलग-अलग मेडिकल संचालकों का मानना है कोविड के समय में सबसे ज्यादा सर्दी खांसी बुखार की दवा की मांग बढ़ी जिसे अच्छे-अच्छे कंपनियों ने दवा की पूर्ति नहीं कर पाई लेकिन डोलो 650 दवा की सप्लाई जारी रखी और लोगों को आसानी से दवा मिलने लगी जिससे इसकी मांग सामान्य दिनों की अपेक्षा 4 गुना बढ़ी है।

साइड इफेक्ट्स मिनिमम

बुखार के लिए सालों से पैरासिटामॉल सबसे कारगर दवा है। ये बुखार जल्द कम करती है। इसके साइड इफेक्ट्स मिनिमम हैं। ये बच्चों से लेकर बुजर्गों तक को आराम से दी जा सकती है। डोलो टैबलेट की पापुलैरिटी पर डॉ. राकेश गुप्ता का कहना हैं कि इसकी दो बड़ी वजह हैं। पहला तो इस दवा का नाम जुबान पर चढ़ जाता है और ये हर जगह आसानी से अवेलेबल है। इसके कॉम्पिटीटर्स पायरीजेसिक, पैसिमॉल, फेपानिल और पैरासिप वगैरह हैं, जो बोलने और लिखने में कठिन हैं। दूसरी वजह  ये दवा 650 mg में आती है  जिस वजह से इसका असर देर तक रहता है। इसलिए तेज बुखार में डॉक्टर इसे ज्यादा प्रिस्क्राइब करते है।

डोलो ने क्रोसिन को रिप्लेस किया

कोरोना लहर में डॉक्टर ने जमकर डोलो प्रिस्क्राइब किया। एक दूसरे की देखा-देखी लोग खुद भी मेडिकल स्टोर जाकर डोलो 650 खरीदने लगे। यानी  ओवर द काउंटर मेडिसिन में डोलो ने क्रोसिन को रिप्लेस कर दिया और महज 20 महीने में बिक्री के रिकॉर्ड तोड़ दिए। जनवरी 2020 में कोरोना महामारी आने के बाद गूगल पर 2 लाख से ज्यादा लोगों ने ‘Dolo 650’ कीवर्ड सर्च किया है। इस तरह डोलो 650 भारत की दूसरी सबसे ज्यादा बिकने वाली एंटी-फीवर दवा बन गई।

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