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राष्ट्रीय हिन्दी दिवस समारोह में विद्यार्थी सम्मानितमैट्स यूनिवर्सिटी में हिन्दी सप्ताह का रंगारंग समापनबच्चों को मातृभाषा से जोड़ना आवश्यक – ड़ॉ. जया जादवानीरायपुर। राष्ट्रीय हिन्दी दिवस के अवसर पर मैट्स यूनिवर्सिटी के हिन्दी विभाग द्वारा आयोजित हिन्दी सप्ताह का रंगारंग समापन हुआ। इस अवसर पर विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। समारोह की मुख्य अतिथि वरिष्ठ महिला साहित्यकार डॉ. जया जादवानी थीं।
मैट्स यूनिवर्सिटी के हिन्दी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. रेशमा अंसारी ने बताया कि राष्ट्रीय हिन्दी दिवस के अवसर पर विभाग द्वारा बीते कई वर्षों से हिन्दी सप्ताह का आय़ोजन किया जा रहा है। इस वर्ष 9 सितंबर 2022 से 14 सितंबर 2022 तक हिन्दी सप्ताह का आयोजन किया गया। हिन्दी सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया गया जिसके विजेता-उपविजेता विद्यार्थियों को समापन समारोह में पुरस्कृत किया गया। समारोह की मुख्य अतिथि वरिष्ठ महिला साहित्यकार डॉ. जया जादवानी थीं। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि संवाद हमारी गहरी जरूरतों में से एक है और हम सब अभिव्यक्त होना चाहते हैं, कुछ न कुछ कहना और कुछ सुनना चाहते हैं और भाषा के बिना यह संभव नहीं है। भाषा सभी की होती है, जंगल की, नदियों की, समंदर की, परिंदों की, जानवरों की पर इन सब की भाषा कुदरती होती है। मानव ने अपनी भाषा खुद इजाद की है । उऩ्होंने कहा कि हमें कम से कम 3 भाषाओं को लिखना-पढ़ना सीखना चाहिए। अपनी मातृभाषा, अपनी राजभाषा हिंदी और अंतर्राष्ट्रीय भाषा अंग्रेजी। आज अपनी मातृभाषा से बच्चे दूर होते जा रहे हैं। मातृभाषा से जुड़ने का अर्थ पूरे सांस्कृतिक परिवेश से जुड़ना है और बच्चों को मातृभाषा से जो़ड़ना आवश्यक है।
इस अवसर पर मैट्स विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. के.पी. यादव ने कहा कि हर भाषा का अपना महत्व होता है। अंग्रेजी भाषा को ज्यादा महत्व दिया जाता है। हिन्दी भाषा को भी महत्व दिया जाना चाहिये क्योंकि अपने ही देश में हिन्दी का महत्व नहीं होगा तो विदेशों में कैसे प्रचार-प्रसार कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिदृश्य में हिन्दी में काफी संभावनाएं हैं।
इसके पूर्व समारोह का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन के साथ किया गया। अपने स्वागत भाषण में विभागाध्यक्ष हिन्दी डा. रेशमा अंसारी ने कहा कि हिन्दी भाषा हमारे जीवन मूल्यों, संस्कृति एवं संस्कारों की सच्ची संवाहक है। बहुत ही सरल, सहज, मीठी तथा वैज्ञानिक भाषा है। इसके बोलने, समझने व चाहने वालों की संख्या समूचे विश्व में आसानी देखी जा सकती है। हिन्दी भाषा को हमें व्यवहार में लाना होगा तभी हिन्दी का विकास तेजी से हो पाएगा। हिन्दी भाषा के प्रचार से पूरे देश मे एकता की भावना प्रबल होगी।
समारोह का संचालन डॉ. सुनीता तिवारी ने किया। पुरस्कार वितरण का संचालन डॉ. रमणी चंद्राकर, डॉ. सुपर्णा श्रीवास्तव, प्रियंका गोस्वामी ने किया। समापन समारोह में हिन्दी विभाग के प्राध्यापकगण सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापकगण एवं विद्यार्थीगण उपस्थित थे।
पुरस्कृत विद्यार्थी
हिन्दी सप्ताह के अंतर्गत आयोजित विभिन्न रचनात्मक प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं सांत्वना पुरस्कार प्राप्त करने वाले  विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र एवं अन्य पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इनमें लोकनृत्य में संस्कृति, कुणाल, श्रीनिधि, हेमंत (प्रथम-आईटी विभाग), नीतू सिंह, गीता वर्मा, उर्मिला गोंड, सुप्रिया (द्वितीय-हिन्दी विभाग), नीलू, इरिशा, इतिशा, सतिंदर,  लवलीना, भूमिका (तृतीय-एफडी विभाग), कहानी लेखन-नेहा गोलछा, सुनीता बंजारे, गीता वर्मा, पत्र लेखन-नेहा गोलछा, उर्मीला गोंड, अलीशा फातिमा, तात्कालिक भाषण- संजीव बेनर्जी, देव्यांशी, गीता वर्मा, पेंटिंग-अलीशा, मुस्कान, अमन चक्रधारी, काव्य पाठ-सुनीता बंजारे, नेहा गोलछा (क्रमशः प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त) शामिल थे।