NHM BREAKING : आज़ादी के 75 बरस, एक तबका अब तक गुलाम – The News Ocean






न्यूज़ ओशन ब्यूरो। रायपुर। छत्तीसगढ़ सर्व विभागीय संविदा कर्मचारी महासंघ के प्रांताध्यक्ष कौशलेश तिवारी ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देश को अमन-चैन और विकास की शुभकामनाएं दीं तथा प्रदेश में संविदाकर्मियों की बुरी हालत की तरफ ध्यान आकृष्ट किया।



उन्होंने कहा कि एक ओर देश आज़ादी की 76वीं वर्षगांठ मना रहा है वहीं देश का एक तबका गुलामों की ज़िंदगी बसर करने पर विवश है। ये तबका संविदाकर्मियों का है, जिन्हें ना तो किसी प्रकार के महंगाई भत्ते की पात्रता है, ना ही किसी प्रकार का बीमा ना ही मृत्यु की स्थिति में किसी प्रकार के उपादान की व्यवस्था है। संविदाकर्मियों की हालत गिरमिटिया मजदूरों की तरह हो गई है, जिस प्रकार अंग्रेज देश के गरीब मजदूरों को विदेश ले जाकर मजदूरी कराते थे, बिल्कुल वही आज अनुबंध पर कार्य कर रहे संविदाकर्मियों के हालात हैं।


एक आजाद समाज और जनता के द्वारा चुनी गई सरकार के लिए यह कितनी दुःखद और शर्मनाक स्थिति है कि एक तरफ हम आज़ादी की 76 वां सालगिरह मना रहे हैं वहीं दूसरी तरफ राज्य के सामाजिक अंकेक्षण इकाई में कार्यरत संविदा कर्मी पिछले 9 माह से अपने वेतन की प्रतीक्षा में भूखों मरने की नौबत तक पहुंच चुके हैं। ये पूरे देश के लिए शर्मनाक है कि वे इतने निराश हो गए हैं कि अपने परिवार के भरण-पोषण में भी अक्षम हैं और अपने वेतन के लिए 16 अगस्त से आंदोलन पर जाने को मजबूर हो गए हैं। प्रदेश के हर जन प्रतिनिधि और अधिकारी को यह सोचना चाहिए कि क्या वह बिना वेतन के एक दिन भी गुज़ार सकते हैं ? समाजिक अंकेक्षण इकाई के संविदा कर्मी का भी परिवार है,पत्नी हैं,बच्चे हैं और इसके अलावा भी घर में उनके आश्रित लोग हैं । आज़ादी का यह महोत्सव अपने कर्मचारियों को भूखे रख कर, उन्हें अनदेखा करके नहीं मनाया जा सकता ।

लेकिन हर बार संविदाकर्मी इस उम्मीद में होते हैं कि मुख्यमंत्री अपने भाषण में उनका जिक्र करेंगे, उनके लिए कोई सौगात आएगी लेकिन नतीजा हर बार वही ढाक के तीन पात वाला रहता है। देखें कल का सवेरा इनके लिए क्या लेकर आता है, कोई सौगात या वही एक झूठी दिलासा।