Tiger Boy Chendru की कहानी, जिसे छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल स्मृति के



 

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर Tiger Boy Chendru की मूर्ति का अनावरण किया। इसे पर्यटन मंडल स्मृति के रूप में उपयोग करेगा। कौन था Tiger Boy Chendru आइये जानते हैं…

हॉलीवुड कहानी जंगल बुक के मोगली से तो हर कोई परिचित है, कैसे मोगली का जीवन जंगल और जंगल में रहने वाले जानवरों के साथ रहा । कहानी से अलग हकीकत में एक मोगली था जो छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल क्षेत्र में रहता था जिसका नाम Chendru Mandavi (चेंदरू मंडावी) था। Chendru बस्तर का एक आदिवासी बच्चा था जिसकी दोस्ती बाघ से थी, वो दिनभर उसके साथ खेलता था, सोता था।

 

चेंदरू खतरनाक शेरों के साथ खेलता था

सन् 1960 का घने जंगलो से घिरा घनघोर अबूझमाड़ का बस्तर पुरे बस्तर में फैला मुरिया जनजाति के लोगो का साम्राज्य , इन घने जंगलो में Chendru नाम का 10 वर्षीय बच्चा खतरनाक शेरों के साथ सहज तरीके से खेलता था, अठखेलियाँ करता था।

आपको जानकर हैरानी होगी कि इस बच्चे पर स्वीडिश डायरेक्टर ने फिल्म भी बनाई जिसने इस बच्चे को विश्वप्रसिद्ध कर दिया।

मुरिया जनजाति का था

चेंदरू नारायणपुर के गढ़ बेंगाल का रहने वाला था। मुरिया जनजाति का यह लड़का बड़ा ही बहादुर था। बचपन में चेंदरू को उनेक दादा ने जंगल से बाघ के शावक को लाकर दे दिया था। चेंदरू ने उसका नाम टेंबू रखा था। इन दोनों की बाद में दोस्ती ऐसे हुई, जो मिसाल साबित हुई।

एन द जंगल सागा में किया काम

स्वीडन के ऑस्कर विनर फिल्म डायरेक्टर आर्ने सक्सडॉर्फ ने एक फिल्म बनाने की सोची और वो फिल्म बनाने के मकसद से बस्तर आए यहां उन्होंने चेंदरू को हीरो का रोल दिया और बस्तर में रहकर ही 2 साल शूटिंग की। फिल्म का नाम था एन द जंगल सागा जो 1957 में रिलीज हुई। जिसे इंग्लिश में दि फ्लूट एंड दि एरो के नाम से जाना गया।

चेंदूरू टाइगर ब्यॉय के नाम से है फेमस

फिल्म रिलीज होने के बाद चेंदरू को भी स्वीडन और बाकी देशों में ले जाया गया। उस दौरान वह महीनों विदेश में रहा। चेंदूरू टाइगर ब्यॉय के नाम से फेमस होने लगा।

इसी बीच उनकी तत्कालीन पीएम पंडित जवाहर लाल नेहरू से भी मुलाकात हुई।  तब चेंदरू को पीएम नेहरू ने पढ़ने-लिखने पर नौकरी का आश्वासन दिया था, पर लौटकर जब वो बस्तर आया तो वह पढ़ नहीं सका। फिर गुमनामी में ही जीने लगा।

अपने गांव लौटने के बाद चेंदरू चकाचौंध ग्लैमर में जीने का आदी हो चुका चेंदरू गांव में गुमसुम सा रहता था। एक समय ऐसा आया कि गुमनामी के वो बाहर की दुनिया से पूरा अलग हो गया। फिर एक दिन आया कि 18 सितम्बर  2013 में लम्बी बीमारी से जूझते हुए इस गुमनाम हीरो टाइगर बॉय की मौत हो गयी।