Wild elephants were driven away by tantra-mantra : जंगली हाथियों को

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जनधारा 24 न्यूज डेस्क। Wild elephants were driven away by tantra-mantra :

कहां जंगली हाथियों का दल गांवों में डाले है डेरा ?

Wild elephants were driven away by tantra-mantra :

इस दल में कुल कितने हाथी हैं ?

कौन गया था इन हाथियों को तंत्र-मंत्र से भगाने ?

उसके बाद हाथियों ने उसके साथ क्या किया ?

सब कुछ आपको बताएंगे,

बस आप बने रहिए जनधारा 24 के साथ-

दरअसल धमतरी जिले के खल्लारी निवासी बुधराम कावड़े उम्र 70 साल को

साल्हेभाट में जंगली हाथियों ने पटक-पटक कर मार डाला।

बुधराम कावड़े अपने भांजे के घर तंत्र-मंत्र के दम पर

जंगली हाथियों को भगाने के लिए गया था।

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के साल्हेभाट और

आसपास के गांवों में कुल 32 हाथियों के

एक गजदल ने पिछले कई दिनों से डेरा डाल रखा है।

जंगली गजराजों का दल किसानों की

फसलों का काल बना हुआ है।

जिसके भी खेत में ये हाथी घुसते हैं

उसी का सत्यानाश कर दे रहे हैं।

Wild elephants were driven away by tantra-mantra : जंगली हाथियों को तंत्र-मंत्र से गया था भगाने.....और फिर
Wild elephants were driven away by tantra-mantra : जंगली हाथियों को तंत्र-मंत्र से गया था भगाने…..और फिर

धमतरी के खल्लारी का रहने वाला बुधराम कावड़े

अपने भांजे के घर साल्हेभाट पहुंचा। उसका दावा था कि

वो जंगली हाथियों को तंत्र-मंत्र के दम पर भगा लेगा।

स्थानीय लोग भी जंगली हाथियों के आतंक से रिहाई चाहते थे।

लिहाजा वे सभी भी तैयार हो गए।

Sent khallari to the whole family

बुधराम कावड़े के सिर पर तंत्र-मंत्र का भूत इस कदर सवार था कि

उसने अपने तमाम परिजनों को खल्लारी भेज दिया।

खुद साल्हेभाट स्थित भांजे के घर में बैठ गया।

Did anyone go to save Budhram as well?

अब आपके जेहन में सवाल आ रहा होगा कि

क्या बुधराम को बचाने भी कोई गया था ?

तो आपको बता दें कि धमतरी फारेस्ट डिपार्टमेंट की टीम

गजराज वाहन के साथ वहां पहुंची थी।

वन विभाग की टीम को आता देख बुधराम

कहीं जाकर छिप गया था।

शाम का वक्त था लिहाजा वन विभाग की

टीम को भी वहां से वापस आना पड़ा।

 

महुए की गंध के चलते गांव में दाखिल हुए दंतैल

27 दिसंबर की रात 7ः30 से 8ः30 बजे के बीच ही

दंतैलों का दल गांव में दाखिल हुआ।

उनको वहां महुए की गंध मिल रही थी।

इसी बीच किसी हाथी की नजर वहां घर में बैठे बुधराम पर पड़ गई।

बस फिर क्या था हाथियों का दल बुधराम को उठा-उठाकर पटकने लगा।

उसके बाद उसको ऐसा उछाला कि

वो पास स्थित बाड़ी में जा गिरा।

वहां भी हाथियों के दल ने उसको नहीं बख्शा।

उसका चेहरा और पैर कुचल कर विदीर्ण कर डाला।

अगले दिन सुबह ही जब वन विभाग का

अमला गांव पहुंचा तो वहां उनको बुधराम की लाश मिली।

वन विभाग के अफसरों ने उसका पंचनामा

करवा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

इसके अलावा खबर लिखे जाने तक

उसके परिजनों को मुआवजे की

राशि का भी भुगतान किया जा चुका था।